नागी-नकटी डैम में विकसित किए जाएंगे 10 टापू

जमुई। एएनएन

जिले के झाझा में अवस्थित नागी-नकटी डैम को पर्यटकों के साथ-साथ प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करने की कवायद तेज हो गई है। डैम में 10 आइलैंड (टापू/टील्हा) तैयार कर उस पर पक्षियों के मनोनुकूल फलदार वृक्ष लगाए जाएंगे।योजना के तहत केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा 60:40 के अनुपात में राशि खर्च की जाएगी। इसके लिए 18 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है तथा 12 लाख रुपये तत्काल वन प्रमंडल जमुई को रिलीज कर दिया गया है।
पानी के बीचोबीच निर्मित टील्हे पर गुलर और जामुन के पौधे रोपित किए जाएंगे ताकि उन पौधों पर पक्षियों का बसेरा बन सके।

उद्देश्य यह भी कि रोपित पौध जब वृक्ष बनें तो उसके फल से आगंतुक पक्षियों को भोजन प्राप्त करने में आसानी हो। इसके अलावा योजना के तहत डैम में नाव के सहारे बीड की साफ-सफाई भी की जाएगी।इसको लेकर वन प्रमंडल पदाधिकारी सत्यजीत कुमार एवं एसएसबी के अधिकारी विनय कुमार ने नागी-नकटी डैम का निरीक्षण किया। डीएफओ ने बताया कि नेशनल प्लान फोर कंजर्वेशन ऑफ एक्यूवेटिक सिस्टम के तहत उक्त योजना की राशि स्वीकृति की गई है। मौसम में ठंडक आते ही नागी-नकटी जलाशय पर प्रवासी पक्षियों का आगमन प्रारंभ हो गया है। अमूमन यहां नवंबर माह से ही प्रवासी पक्षियों का आगमन प्रारंभ हो जाता है जो अप्रैल माह तक रहता है।

प्रवासी पक्षियों के अभ्यारण्य का आनंद लेने दिल्ली, कोलकाता, पटना, भागलपुर, मुंगेर आदि कई शहर से पर्यटक पहुंचते हैं। प्रवासी पक्षियों के रेन-बसैरा एवं भोजन के लिए वन विभाग द्वारा पूरी तैयारी की गई है। पर्यटकों के लिए वन विभाग नागी पर चलंत सूचना केन्द्र तक खोले हुए है। पक्षियों के लिए फलदार एवं छायादार पौधे भी लगाए गए हैं। प्रवासी पक्षियों में सर्बियन क्रेन , डामीडेथ, पोचार्ड, लालसर, ओपन बिल स्टाप, काली गर्दन वाली पनडुब्बी, छोटी पन डुब्बी, वनकौआ आदि कई महीनों तक जलचर करते है। पक्षियों के भोजन के लिए डैम में मछली, घोंघा के अलावा झाड़ी में छुपे कई प्रकार के जीव-जंतु मौजूद हैं। प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा वन प्रमंडल प्रबंधन समिति का गठन भी किया गया है। विस्तृत कार्य योजना के तहत 521 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले नागी-नकटी पक्षी विहार पर अब तक लाखों खर्च हुए हैं।