9 साल बाद पुलिस गोली से मारे गए निर्दोष युवक के परिवार को मिला न्याय

जमुई। एएनएन (Action News Network)

चरकापत्थर थाना क्षेत्र के टहकार गांव निवासी अयोध्या यादव के बेटे इंद्रदेव यादव की 9 साल पूर्व पुलिस गोली से हुई मौत के बाद राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के पारित आदेश के बाद गुरुवार को स्व इंद्रदेव यादव के निकटतम स्वजन को क्षतिपूर्ति / मुआवजा के रूप में पांच लाख रुपये दिए जाने का आदेश पारित किया है।

उक्त स्वीकृति-आदेश वित्त विभाग के परिपत्र संख्या 2561 दिनांक 17 अप्रैल 1998 के आलोक में निहित आदेश के अधीन निर्गत किया जा रहा है। बिहार सरकार गृह विभाग की विशेष शाखा ने इसकी सारी जिम्मेदारी जिलाधिकारी जमुई को सौंपी है। मृतक के परिजन को उक्त राशि रेखांकित चेक अथवा बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से दी जाएगी।बीएमपी की गोली लगने से हुई थी इंद्रदेव की मौत 2010  में जब चरका पत्थर में थाना संचालित नहीं हुआ करता था।

उस वक्त इस इलाके में  नक्सलवाद चरम पर था। इलाके की सुरक्षा की जिम्मेदारी तब चरकापत्थर मिडिल स्कूल में रह रहे बीएमपी 13 पर थी। 17 दिसम्बर 2010 को मोहर्रम जुलूस में शामिल होने अपने साथियों के साथ 26 वर्षीय इंद्रदेव यादव भी गंडा गांव गया हुआ था। रात दो बजे वह अपने साथियों के साथ चरकापत्थर होते हुए टहकार लौट रहा था। इस दौरान बीएमपी कैंप पर संतरी ड्यूटी में लगे जवानों ने इन युवकों को रुकने को कहा लेकिन ये लोग उनकी आवाज नहीं सुन पाए। लिहाजा संतरी ने गोली चला दी थी।

उक्त गोली इंद्रदेव यादव को लगी और उसकी मौत हो गई। थमहन पंचायत के तत्कालीन मुखिया गजेंद्र यादव ने इस घटना की प्राथमिकी सोनो थाने में दर्ज कराई थी। आरोप था कि बीएमपी ने उनके निर्दोष भतीजे इंद्रदेव पर नक्सली समझकर गोली चला दी जिसके कारण उसकी मौत हो गई। मृतक इंद्रदेव यादव मुखिया के बड़े भाई अयोध्या यादव का बेटा था। उक्त मामले को मानवाधिकार में ले जाया गया जहां 9 वर्षों बाद मृतक इंद्रदेव के स्वजनों को न्याय मिल पाया है। बता दें कि इंद्रदेव की मौत के बाद उसकी पत्नी ने दूसरी शादी कर ली थी। इंद्रदेव की बेटी अंशु कुमारी टहकार में अपने दादा-दादी के साथ रहती है।