संघ प्रतिबन्ध में जेल गए 91 वर्षीय स्वयंसेवक भोला दत्त को किया सम्मानित

कोटद्वार। एएनएन (Action News Network)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों ने जगदेव शाखा का वार्षिकोत्सव कार्यक्रम धूमधाम से मनाया। इस मौके पर संघ प्रतिबन्ध में जेल गए 91 वर्षीय भोला दत्त पांडे को शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि संघ समरसता, बंधुत्व व राष्ट्रीय एकीकरण की संकल्पना की दिशा में समाज जागरण व व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है।

रविवार को स.वि.म.उमरावनगर में जगदेव शाखा का वार्षिकोत्सव में जिला संचालक विष्णु अग्रवाल जिला कार्यवाह संदीप उनियाल और जगमोहन रावत ने भोला दत्त पांडे का शॉल भेंट कर स्वागत किया। साथ ही सतीश चंद्र पांडे का स्वागत नगर कार्यवाह मनीराम शर्मा ने शाल भेंट कर किया। इस मौके पर 55 स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सूर्य नमस्कार, योग व्यायाम सहित अन्य कार्यक्रमों का प्रदर्शन बच्चों द्वारा किया गया।

इस मौके पर जिला संचालक विष्णु अग्रवाल ने बताया कि भोला दत्त पांडे का सानिध्य और उनका मार्गदर्शन कोटद्वार में कई स्वयंसेवकों को मिला है। आज इन्हीं से प्रेरणा लेकर कई स्वयंसेवक संघ कार्य की प्रगति हेतु कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्ति एवं व्यक्तित्व निर्माण की कार्यशाला है। संघ की शाखा में बच्चों के भीतर साहस, समर्पण और स्वाभिमान और देशभक्ति का भाव पैदा किया जाता है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति और अनुशासन वर्तमान समय में समाज की आवश्यकता है। एकता के सूत्र में संपूर्ण मानव समाज को पिरोए बिना देश को भव्य एवं दिव्य नहीं बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर जिला शारीरिक प्रमुख जितेंद्र रावत, जिला धर्म जागरण प्रमुख विकास पंत, नगर शारीरिक प्रमुख योगेश कुमार, नगर बौद्धिक प्रमुख निर्मल कैमिनी मंडल प्रमुख अभिषेक सहित कई स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

भोला दत्त पांडे का जीवन संघर्ष
91 बसंत देख चुके भोला दत्त पांडे का जन्म 1928 मेंहुआ था 1945 में बिजनौर में संघ के संपर्क में आए और 1948 में हाईस्कूल पास करने के बाद संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष किया। साल 1949 में संघ प्रतिबंध के दौरान 11 दिन लखनऊ जेल में बंद रहे। इस दौरान उनके भाई सतीश चंद्र पांडे ने संघ कार्य के लिए उनका पूर्ण सहयोग किया और 1993 में शिवराजपुर कोटद्वार में आकर बस गए। इससे पूर्व संघ के द्वितीय संघचालक श्री गुरुजी का सानिध्य भी कई बार इन्हें प्राप्त हुआ।