सांभर झील में पक्षियों की मौत का कारण एवियन बोच्यूलिज्म

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली की रिपोर्ट में रोग की पुष्टि

जयपुर। एएनएन (Action News Network)

सांभर झील और इसके भराव क्षेत्र में पिछले दिनों से अचानक मृत पाये जा रहे प्रवासी एवं देशी पक्षियों की मौत का कारण एवियन बोच्यूलिज्म पाया गया है, जो कि क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिज़्म नामक जीवाणु के संक्रमण से होता है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली उत्तर प्रदेश की गुरुवार प्राप्त रिपोर्ट में इस रोग की पुष्टि हो गयी है।

राज्य के पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने गुरुवार को बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं इस मामले की दैनिक मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस सम्बन्ध में विभिन्न विभागों के साथ कई बैठकें भी कर चुके हैं। केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को बीमार पक्षियों की उत्तरोत्तर जांच के लिए भी अनुरोध कर चुके हैं। पशुपालन विभाग द्वारा अब तक 735 बीमार पक्षियों का उपचार किया गया है जिनमें से 368 जीवित हैं जबकि 36 को पुनः आकाश में छोडा जा चुका है।

उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र से मृत पक्षियों को एकत्र कर शवों का वैज्ञानिक पद्धति से निस्तारण किया जा रहा है। बीमार और लकवाग्रस्त पक्षियों को उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे पक्षियों के हताहत होने की संख्या में कमी आयी है।

कटारिया ने बताया कि पक्षियों के बीमार होने की सूचना प्राप्त होते ही विभाग द्वारा तुरन्त कार्रवाई करते हुए 20 चिकित्सा दलों का गठन किया गया जिसमें 20 वेटरनरी डाक्टर, 74 पशुधन सहायक और चार आपातकालीन चल चिकित्सा इकाइयों को सांभर झील और आसपास के भराव क्षेत्र में पक्षियों के उपचार के लिए तैनात किया गया। मौके पर तीन राहत केन्द्र- काचरोदा, रतन तालाब एवं नावां में स्थापित किये गये हैं जहां पर बीमार पक्षियों को उपचार के लिए पशुपालन विभाग एवं वन विभाग की विशेष देखरेख में रखा जा रहा है।

कटारिया ने बताया कि सांभर झील एवं उसके भराव क्षेत्र के आसपास बीमार पाये जा रहे पक्षियों के लिए दवाइयों की समुचित व्यवस्था की जा चुकी है एवं स्थिति पर कडी निगरानी रखी जा रही है।

विभाग के सचिव डा. राजेश शर्मा एवं विभाग के निदेशक डा. शैलेश शर्मा एवं अन्य सम्बद्ध अधिकारी प्रभावित क्षेत्र का निरन्तर दौरा कर राहत एवं उपचार कार्यों का प्रभावी पर्यवेक्षण कर रहे हैं।

गौरतलब है कि वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर के तकनीकी विशेषज्ञों के दल ने प्रोफेसर डा. अनिल कटारिया के नेतृत्व में प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था और उनकी रिपोर्ट में क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिज़्म के जीवाणु संक्रमण को रोग का प्रमुख कारण बताया गया था, जिसकी आज पुष्टि हो गयी है। उधर,राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल द्वारा भी प्रभावित पक्षियों में बर्ड फ्लू रोग नहीं होना पाया गया था।

उल्लेखनीय है पिछले दिनों विश्व प्रसिद्ध खारे पानी की सांभर जील में साइबेरियन क्रेन समेत करीब तीन दर्जन प्रजाति के पक्षियों की मौत लगातार हो रही है। मृत पक्षियों का आंकड़ा करीब 18 हजार है। यह मामला संसद में भी उठा था। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री इस मामले को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कर चुके हैं, लेकिन पक्षियों की मौत पर विराम नहीं लग पा रहा है।