किसान नहीं संसद का सौंदर्यीकरण मोदी सरकार की प्राथमिकता : प्रियंका

नई दिल्ली। एआईएन

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार को संसद, सचिवालय और रायसीना हिल्स पर स्थित पुराने सरकारी भवनों को नया रूप देने की केंद्र सरकार की योजना पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकता गन्ना किसान नहीं बल्कि संसद और इंडिया गेट इलाके का सौंदर्यीकरण है। उन्होंने इस योजना के माध्यम से सरकार पर अपने कारोबारी दोस्तों को आर्थिक लाभ पहुंचाने का भी आरोप लगाया है।

प्रियंका ने ट्वीट संदेश में कहा कि दिल्ली के सबसे मशहूर, खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थान संसद भवन से इंडिया गेट तक के क्षेत्र को “सुंदर” बनाने का ठेका एक गुजराती कंपनी को 12,450 करोड़ रुपये में दिया गया है। जबकि उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का सात हजार करोड़ रुपये बकाया नहीं दिए जाने से उनकी आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। भाजपा सरकार होश खो रही है।

किसानों के प्रकोप से सावधान रहने के लिए सरकार को चेतावनी देते हुए प्रियंका ने कहा कि सरकार किसानों के पेट पर लात मारकर अपने मित्रों की जेबभर रही है। जिस दिन देश का किसान जागेगा, उस दिन से सावधान….वह दिन आएगा।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने संसद भवन तथा एकीकृत केंद्रीय सचिवालय के पुनर्निर्माण और सेंट्रल विस्टाव के पुनर्विकास के लिए परामर्श सेवा का ठेका गुजरात की कंपनी मेसर्स एचसीपी डिजाइन, प्लारनिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को 229.75 करोड़ रुपये में दिया है। केंद्र ने शुक्रवार को पुनर्विकास के लिए सख्त समय सीमा तय करते हुए बताया था कि लोकनिर्माण विभाग को सेंट्रल विस्टा परियोजना का काम नवंबर 2021, नए संसद भवन का निर्माण मार्च 2022 तक और एकीकृत केंद्रीय सचिवालय का काम मार्च 2024 तक पूरा करने को कहा गया है।

केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार, इस कार्य के लिए सीपीडब्ल्यू को 24 निविदाएं प्राप्त हुई थीं, जिनमें से अंतिम बोली प्रक्रिया में चार का चयन किया गया था। अंतिम बोली प्रक्रिया 12 अक्टूबर को संपन्न हुई और आखिर में परामर्श सेवा का ठेका मेसर्स एचसीपी डिजाइन, प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को दे दिया गया।

यह देश की अग्रणी आर्किटेक्ट कंपनी है, जिसे गांधीनगर में सचिवालय भवन, अहमदाबाद में साबरमती नदी के आसपास के क्षेत्र को पुनर्विकसित करने, मुंबई बंदरगाह परिसर विकास, वाराणसी में मंदिर परिसर पुनर्विकास और अहमदाबाद में आईआईएम का नया परिसर बनाने के अलावा कई ऐसी परियोजनाओं का खासा अनुभव है।

रायसीना हिल्स पर स्थित सरकारी भवनों का निर्माण 1911 से 1931 के बीच हुआ था। इनकी डिजाइनिंग जाने माने विदेशी वास्तुककार सर एडविन लुटिनय और सर हरबर्ट बेकर ने तैयार की थी। संसद भवन भी इन्हीं दिनों बना था। इसके साथ ही राजपथ के दोनों और स्थिति कई सरकारी भवनों का निर्माण विभिन्न सरकारी कार्यालयों के लिए किया गया। सेंट्रल विस्टा के तहत राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक का क्षेत्र आता है। सौ वर्ष से भी ज्यादा पहले बनाई गई इन इमारतों की जरूरत अब समय के साथ काफी बदल गई है। इसी के चलते सरकार ने इस क्षेत्र को पुनर्विकसित करने की योजना शुरू की है।