‘हाउडी मोदी ‘ के जवाब में ‘केम छो’ को लेकर बेहद उत्साहित हैं ट्रम्प

वाशिंगटन । एएनएन (Action News Network)

ह्युस्टन में प्रवासी भारतीय डायसपोरा ने जिस तरह ‘होडी-मोदी’ के गगनभेदी नारों से दुनिया के सर्व शक्तिशाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दिल जीत लिया था, उसी तरह अहमदाबाद से मोटेरा के सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम तक 24 किलोमीटर के रास्ते पर दोनों ओर लाखों की तादाद में गुजराती बंधु ‘केम छो ट्रम्प’ के उद्घोष के साथ अपने विशिष्ठ अथिति के मन में  बस जाएं, तो कोई हैरानी नहीं होगी। इस तरह की चर्चा अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में, ख़ासतौर से ह्युस्टन, टेक्सास में हर कोई भारतीय की जुबान पर है । 

डोनाल्ड ट्रम्प और प्रथम महिला मेलेनिया ट्रम्प क साथ प्रशासनिक अधिकारी और अमेरिकी पत्रकार एयरफ़ोर्स वन पर सवार हो 24-25 फरवरी को भारत यात्रा पर आ रहे हैं। राष्ट्रपति के रूप में ट्रम्प की यह पहली भारत यात्रा होगी।  यूं तो ट्रम्प इस बात से भली भाँति अवगत है कि भारतीय संस्कारों में ‘अतिथि देवों भव:’ सर्वोपरि है।   

अहमदाबाद से एक दशक पूर्व अमेरिका आए गुजराती पंडित जगदीश राजगौर ने बातचीत में कहा कि हिंदुस्तानी, वह भी गुजराती समुदाय अपने अतिथि के सम्मान में पलक-पांवड़े बिछाने को उत्सुक रहता है। असल में ‘केम छो,’ ट्रम्प के सम्मान में अहमदाबाद हवाई अड्डे से सड़क के दोनों ओर नृत्य और संगीत में डूबे पुरुष-महलाओं और फिर एक लाख से अधिक दर्शकों की क्षमता वाले विशाल नवनिर्मित क्रिकेट स्टेडियम में अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रथम महिला मेलेनिया ट्रम्प जब ख़ुद इतने बड़े जनसमुदाय को देखेंगे तो फिर उन्हें यह भी या रखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरीखा मेहमाननवाज उन्हें दुनिया में  कहीं नहीं मिलेगा। 

दिल्ली से वर्षों पहले लॉस एंजेल्स में आकर बसे कृष्णलाल ने कहा कि बेशक फ़ेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबरग ने ट्रम्प को पहले नंबर से नवाज़ा हो, लेकिन वह अपनी आँखों से देखेंगे की फ़ेसबुक पर नंबर दो के बावजूद मोदी जी की कितने फॉलोअर्स है। इसका भारत के साथ सीमित ‘ट्रेड डील’ पर अनुकूल असर पड़ेगा तो आश्चर्य नहीं है। 

अड़चनें 

अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि रॉबर्ट लिगटज़र ने किन्हीं कारणों से  भारत दौरे को फ़िलहाल टाल दिया है। लेकिन इस बात की ख़ासी चर्चा है कि ट्रम्प की हर संभव कोशिश होगी कि वह बड़े स्तर पर भले ना सही, लेकिन सीमित व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाए।

हालंकि, ट्रम्प अपने पक्ष में  95 प्रतिशत रिपब्लिकन मतदाताओं  से बेफ़िक्र हैं और उन्हें फ़ीडबैक मिल रहा है कि प्रतिपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवारों की भीड़ में आगे चल रहे मध्य वाम मार्गी  बर्नी सैंडर्स को उम्मीदवारी मिलेगी नहीं, और गे उम्मीदवार पेटे को अमेरिकी जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। ऐसे में मोदी की  किंचित यही कोशिश होगी कि पिछले क़रीब एक साल से अधर में लटके व्यापार समझौते को सिरे चढ़ाएं। 

इस समझौते में जो अड़चने आ रही हैं, वे जनहित संबंधित हैं। फिर वे चाहे मेडिकल उपकरणों को लेकर हो या डेयरी तथा पोल्ट्री उत्पादों को लेकर। फिर अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधियों की यह भी कोशिश सुखद वार्ता में ख़लल डाल रही है कि चिकन लेग पर आयात शुल्क सीधे दस प्रतिशत कर दें और डेयरी उत्पादों पर मात्र पाँच प्रतिशत। अमेरिकी प्रतिनिधि शायद यह भूल रहे हैं कि भारत गाँवों में बसता है और इसके आठ करोड़ लोग इसी डेयरी उद्योग से जुड़े हैं। भारत दूध आपूर्ति में दुनिया में पहले नंबर पर है। इनके गूगल, फ़ेसबुक और अमेजन डॉट कॉम संबंधी अड़चनें ड्राफ़्ट डाटा प्राइवेसी संबंधी है, जो सहज नहीं हैं।