हरीश रावत पर एफआईआर तो प्रलोभन देने वाले भाजपा नेताओं पर क्यों नहीं: बिष्ट

हरिद्वार। एआईएन

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर सीबीआई के द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने की निंदा करते हुए इसे प्रदेश व केंद्र सरकार के दवाब में उठाया गया कदम बताया है।

बिष्ट यहां मंगलवार को प्रेस क्लब सभागार में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। बिष्ट ने कहा कि पत्रकार उमेश शर्मा द्वारा पूर्व सीएम विजय बहुगुणा व हरक सिंह रावत के कहने पर किए गए स्टिंग आपरेशन में जब किसी भी प्रकार के लेनदेन की स्वीकार्यता ही नहीं हुई तो सीबीआई जांच किस कारण से करायी गई। उन्हाेंने कहा कि सीबीआई जांच तो भाजपा के उन नेताओं की होनी चाहिए थी, जिन्होंने कांग्रेस के विधायकों को प्रलोभन देकर बागी बनाया और अपनी पार्टी में मिलाया। उन्होंने कहा कि ऐसे क्या कारण रहे कि सत्ता सुख भोग रहे विधायक बागी हो गए। उन्होंनेे आरोप लगाते हुये कहा कि भाजपा ने विधायकों को प्रलोभन देकर बागी बनाकर असंवैधानिक कार्य किया।

बिष्ट ने कहाकि सीबीआई ने सत्ता के दवाब में आकर सत्ता का भोंपू बजाकर हरीश रावत को बदनाम करने का कृत्य किया है। स्टिंग आपरेशन में उमेश शर्मा, हरक सिंह रावत व विजय बहुगुणा की मिलीभगत थी। यही कारण है कि सवा तीन वर्ष बाद हरीश रावत के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। उन्होंने कहाकि त्रिवेन्द्र सिंह रावत के रिश्तेदारों के स्टिंग की भी जांच होनी चाहिए थी, किन्तु सरकार ने पक्षपात करते हुए ऐसा नहीं किया। यदि सरकार हरीश रावत पर सीबीआई की जांच की सिफारिश कर सकती है तो त्रिवेन्द्र रावत के रिश्तेदारों के स्टिंग की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहाकि साजिश के तहत हरीश रावत को फंसाया गया है।

उल्लेखनीय है कि मार्च 2016 में कांग्रेस सरकार में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत समेत कांग्रेस के नौ विधायकों ने हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत कर दी थी और सरकार गिर गई थी। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से अपनी सरकार को बचाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का एक वीडियो सामने आया था। इसी वीडियो के आधार पर हरक सिंह रावत ने राज्यपाल से हरीश रावत के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद से उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई और 31 मार्च 2016 को राज्यपाल की संस्तुति से हरीश रावत के खिलाफ सीबीआई जांच शुरू हुई। सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिक जांच की एक सीलबंद रिपोर्ट अदालत में पेश की थी जिस पर हाल ही में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सीबीआई को इस मामले में आगे बढ़ने और रावत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। कोर्ट से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद सीबीआई ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और निजी चैनल के पत्रकार उमेश कुमार शर्मा पर केस दर्ज किया।