वायु प्रदूषण पर हाईकोर्ट की दिल्ली सरकार को फटकार

नई दिल्ली। एएनएन (Action News Network)

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट ने बढ़ते वायु प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान लिया और दिल्ली सरकार तथा दूसरी एजेंसियों को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि समस्या ये नहीं कि प्रदूषण कम करने को लेकर आइडिया की कमी है। जस्टिस जीएस सिस्तानी की अध्यक्षता वाली बेंच ने वन विभाग को निर्देश दिया कि अवैध अतिक्रमण से संबंधित सभी फोरम में चल रहे लंबित मामलों की सूची तैयार करें। कोर्ट ने मुख्य वन संरक्षक को निर्देश दिया कि वो हलफनामा दायर कर बताएं कि जनवरी 2018 से नवंबर 2019 के बीच कितने पेड़ लगाए गए।

कोर्ट ने हलफनामे में ग्रीन एरिया बढ़ाने और अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए भविष्य के एक्शन प्लान का जिक्र करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सभी नगर निगमों, बोर्डों और कमेटियों को निर्देश दिया कि वे उन लोगों की जिम्मेदारी तय करें, जिनके इलाके में कच्ची सड़कें हैं और खुले में मलबे पड़े हुए हैं। उन व्यक्तियों को ये निर्देश दिया जाए कि वे मलबों पर पानी का छिड़काव कर उनका सही तरीके से निस्तारण करें । कोर्ट ने कहा कि ये काम रुटीन काम में शामिल होना चाहिए औऱ नगर निगमों के वरिष्ठ अधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए मानिटरिंग करें। कोर्ट ने संबंधित विभाग के सचिवों को निर्देश दिया कि वे कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए हलफनामा दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि सरकार के सभी वकील अगली सुनवाई के समय कोर्ट में मौजूद रहें। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वन विभाग के वकील की इस बात के लिए खिंचाई की कि वो सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद नहीं थे। कोर्ट ने कहा कि गंभीरता की कमी की वजह से ही वायु प्रदूषण की ये स्थिति है।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि मलबा, बालू और कच्ची सड़कों पर पानी के छिड़काव के लिए क्या कदम उठाए गए। सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी कैलाश वासदेव ने बताया कि सिंगापुर में पराली जलाने की समस्या पर काबू पाया। उन्होंने कहा कि सिंगापुर और इंडोनेशिया में खेतों में पानी का छिड़काव होता है और पराली को डंप करने के लिए अलग से खेतों की व्यवस्था होती है। वैसे खेतों के आसपास आबादी नहीं होती है। कोर्ट ने इस बात को नोट करते हुए कहा कि जिन देशों में सीमित भूमि है अगर वहां ये उपाय किया जा सकता है तो भारत में क्यों नहीं। सुनवाई के दौरान कैलाश वासदेव ने कहा कि वन विभाग ने पेड़ों को लगाने का सालाना लक्ष्य हासिल नहीं किया। बीस सूत्री कार्यक्रम का क्रियान्वयन पर्याप्त तरीके से नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि वन विभाग में फाइलों को भी व्यवस्थित रूप से नहीं रखा जाता है, जिसकी वजह से कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में दिक्कत होती है।

एमिकस क्यूरी कैलाश वासदेव ने कहा कि निर्माण कार्यों में संतुलन नहीं है। पेड़ों को वैज्ञानिक जरूरत के मुताबिक लगाया जाना चाहिए, क्योंकि सभी पेड़ वायु प्रदूषण कम करने में मददगार नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि सिटी प्लानिंग पर्याप्त नहीं है। अतिक्रमण को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता है। उन्होंने कोर्ट को सुझाव दिया कि अक्टूबर से दिसम्बर के बीच किसी नए भवन का निर्माण या उन्हें गिराने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है और अगर हालात ऐसे ही रहे तो उनका स्वास्थ्य और खराब होगा।