उत्तराखंड में और मजबूत हुआ उपचुनाव का मिथक

पिथौरागढ़ सीट पर उपचुनाव में सत्ताधारी भाजपा की विजय-मंत्री पति प्रकाश पंत की मौत के बाद चंद्रा भी बनी विधायक

देहरादून। एएनएन (Action News Network)

उत्तराखंड में उपचुनाव से जुडे़ मिथक पिथौरागढ़ से और मजबूत होकर सामने आ गए हैं। त्रिवेंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री रहे प्रकाश पंत की मौत के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी और भाजपा उम्मीदवार चंद्रा पंत जीत गई हैं। उपचुनाव में आज तक उत्तराखंड में सत्ताधारी पार्टी का उम्मीदवार कभी नहीं हारा है। इसी तरह जिन नेताओं की मौत के बाद उनकी पत्नी को टिकट दिया गया, उन्होंने अनिवार्य रूप से जीत हासिल की है। इस तरह के मामलों में चंद्रा पंत तीसरी ऐसी महिला विधायक हो गई हैं।

सत्ताधारी पार्टी और जीत का कनेक्शन
उत्तराखंड में ज्यादातर उपचुनाव मुख्यमंत्रियों को विधानसभा भेजने के लिए हुए हैं। अक्सर ऐसी स्थिति बनी है, जबकि मुख्यमंत्री बनने वाले नेता विधानसभा के सदस्य नहीं रहे। उनके लिए विधानसभा सीटें खाली कराई गईं और वे जीतकर विधानसभा तक पहुंचे। इसमें एनडी तिवारी, भुवन चंद्र खंडूड़ी, विजय बहुगुणा, हरीश रावत को शामिल किया जा सकता है। इसी तरह, लोकसभा चुनाव के दौरान समय समय पर कुछ विधायकों को प्रमोट कर उन्हें टिकट दिया और वह दिल्ली पहुंच गए। इसमें डा. रमेश पोखरियाल निशंक, अजय टम्टा को शामिल किया जा सकता है।

ममता और मुन्नी के बाद अब चंदा पंत
उत्तराखंड में उपचुनाव के इतिहास में यह तीसरा मौका है, जबकि विधायक पति की मौत के बाद उपचुनाव में उनकी पत्नी निर्वाचित घोषित हुई हों। वर्ष 2014 में हरीश रावत सरकार में मंत्री सुरेंद्र राकेश की मौत होने पर भगवानपुर सीट से उनकी पत्नी ममता को कांगे्रेस ने टिकट दिया। इसके बाद, 2018 में थराली के विधायक मगन शाह की मौत के बाद उनकी पत्नी मुन्नी को भाजपा ने उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया। इसी तरह छह महीने पहले कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत की मौत के बाद उनकी पत्नी चंदा को भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किया। उन्हें भी जीत हासिल हुई है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों ने तलाशी खुशी
पिथौरागढ़ उपचुनाव का नतीजा सामने आने के बाद भाजपा स्वाभाविक तौर पर खुश है। कुछ दिन पहले रुड़की नगर निगम के मेयर चुनाव में हार के बाद इस जीत से भाजपाइयों के चेहरे खिले हुए हैं। हारने के बावजूद कांगे्रस ने भी अपने खुश होने की वजह तलाश ली है। दरअसल, थराली उपचुनाव के बाद पिथौरागढ़ में भी कांगे्रस ने दमदारी से चुनाव लड़ा है और भाजपा को एकतरफा जीतने नहीं दिया। भाजपा की जीत का अंतर बहुत ज्यादा नहीं रहा है।