आदर्श नगर में किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं राह

नई दिल्ली। रवि भारद्वाज

जैसे-जैसे दिल्ली में चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे सियासी सरगर्मियां भी बढ़ती जा रहीं हैं। कुछ यही हाल दिल्ली की आदर्श नगर सीट का भी है। वैसे तो इस सीट पर फिलवक्त आम आदमी पार्टी का कब्जा है लेकिन इस बार के चुनाव में किसी भी पार्टी के लिए राह आसान नहीं होगी।

आदमी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। उम्मीद के अनुरूप फिर एक बार पवन शर्मा को मैदान में उतारा गया है। वहीं, कांग्रेस से मुकेश गोयल को टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। उधर, भाजपा में दावेदारों की एक लंबी लिस्ट है। इनमें राजकुमार भाटिया, रौशन कंसल से लेकर नीलम, सुरेन्द्र चोपड़ा इत्यादि एक लंबी फेहरिस्त है। अफवाहों का बाजार तो यहां तक गर्म है कि भाजपा किसी नये और बाहरी चेहरे को भी टिकट दे सकती है।

सबके बीच, आदर्श नगर की इस सियासी जंग में सत्ता तक पहुंचने का रास्ता बेहद कठिन नजर आता है। इसे समझने के लिए आपको आदर्श नगर के बैकग्राउंड और वर्तमान परिस्थितियों को समझना होगा।

की आदर्श नगर विधानसभा सीट को हमेशा से कांग्रेस का स्ट्रांगहोल्ड इलाका माना जाता रहा है। लगभग दो दशक तक कांग्रेस के मंगत राम सिंघल ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया।

कहा जाता है कि इस सीट की तासीर कांग्रेसी है। केजरीवाल के उदय से पहले तक आदर्श नगर पर कांग्रेस का एकछत्र राज रहा। भाजपा केवल दो बार ही इस सीट को जीत पाई। पहली बार सन् 1993 में मात्र 39 वोटों से जय प्रकाश यादव की जीत हुई थी। उस समय भी विज नामक एक निर्दलीय (कांग्रेस का बागी) ने दो हजार वोट हासिल कर लिए थे, जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस को हुआ था।

बार, सन् 2013 में राम किशन सिंघल ने जीत दर्ज की थी। उस समय भी आम आदर्मी पार्टी ने कांग्रेस को चोट पहुंचाई थी। आदर्श नगर से जगदीप राणा ने पहली बार झाडू थामी थी। राणा ने कांग्रेस के बड़े वोट बैंक में सेंध लगाई, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिला था और राम किशन सिंघल ने आसान जीत हासिल कर ली थी। लेकिन, साल बाद ही हुए चुनाव में कांग्रेस जीरो हो गई और आम आदमी पार्टी की ऐसी आंधी आई कि भाजपा केवल तीन सीटों पर सिमट कर रह गई।

तो बात हुई इस सीट के बैकग्राउंड की। अब बात करते हैं वर्तमान परिस्थितियों की।

आदर्मी पार्टी ने तो पवन शर्मा को चुनाव मैदान में उतार दिया है। वहीं, मुकेश गोयल को भी कांग्रेस की टिकट मिलना लगभग तय है। ऐसे में जो लोग आदर्श नगर की राजनीति को जानते-समझते हैं, वो इस बात से बखूबी वाकिफ हैं कि इस क्षेत्र में मुकेश गोयल एक बड़ा नाम है। मुकेश वो नेता है जो आखिरी दिन तक बाजी पलटने की ताकत रखता है। इसके अलावा, मुकेश गोयल दिल्ली का इकलौता ऐसा पार्षद है जो एक विधानसभा के सभी निगम वॉर्डों से चुनाव जीत चुका है। लिहाजा, इस विधानसभा क्षेत्र की नस-नस से वाकिफ है। ऐसी स्थिति में मुकेश को कम आंकने की गलती कोई नहीं करेगा।

ओर पवन शर्मा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि दिल्ली में केजरीवाल फिलहाल मजबूत दिख रहें हैं। लेकिन, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इस बार भी 2015 वाली ही आंधी चलेगी। स्थानीय मुद्दों और छवि से भी बहुत कुछ तय होगा। कुछ ऐसा ही मुगालता आम आदमी पार्टी को पंजाब विधानसभा चुनाव में भी हुआ था। एक वायरल विडियो में आप नेता संजय सिंह पंजाब कैबिनेट के पोर्टफोलियो तक तय करते रिकॉर्ड हो गए थे। नतीज क्या हुआ, सरकार कांग्रेस की बन गई। कहीं यहीं ओवरकॉन्फिडेंस आम आदमी पार्टी को दिल्ली में बैकफायर न कर जाए। उधर, 2019 के लोकसभा चुनाव चुनाव में केजरीवाल पार्टी का हाल किसी से छुपा नहीं है।

कांग्रेस की स्थिति अब 2015 विधानसभा चुनाव वाली नहीं है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि लोग फिर से कांग्रेस को याद करने लगे हैं। इसके अलावा आदर्श नगर सीट पर जितने भी बड़े विकास के काम हुए, सभी कांग्रेसी कार्यकाल में हुए। वहीं, पवन शर्मा के नाम, गलियों के निर्माण और सीवर लाइन डालने के अलावा कोई खास बड़ी उपलब्धि नहीं है। साथ ही साथ आदर्श नगर की झुग्गीबस्तियों में मुख्यमंत्री आवास योजना को लेकर भी काफी रोष है। ऐसा इसलिए क्योंकि झुग्गीवालों को ये समझ आ गया है कि केजरीवाल उन्हें उनकी झुग्गी के बदले एक फ्लैट तो दे देंगे लेकिन उन्हें अपनी झुग्गी के साथ-साथ रोजगार से भी हाथ धोना पड़ेगा। यहीं कारण है कि झुग्गी के बदले मिलने वाले फ्लैट को कोई भी झुग्गी वाला नहीं लेना चाहता। वो चाहते हैं कि उन्हें उनकी झुग्गी की ही रजिस्ट्री मिल जाए। इसके अलावा सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के मसले पर जिस तरह से कांग्रेस ने मुसलमानों का साथ दिया, उससे इस समुदाय का कांग्रेस के पक्ष में जाना कोई अतिश्यिोक्ति नहीं होगा। सीएए के मामले पर आम आदमी पार्टी ने अपने-आप को बैकफुट पर ही रखा। ऐसी स्थिति में आदर्श नगर सीट पर मुस्लिमों और झुग्गीवालों का वोट जिस तरफ भी जाता है, जीत उसी की होगी।

अगर हम ये मान भी लें कि लोग स्थानीय विधायक की कमियों और नाकामियों पर ना जाकर केजरीवाल के कामों पर वोट करेंगे तो इस परिस्थिति में आदर्श नगर से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तगड़ी भिडंत होगी, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस और आप का मूलत: वोटबैंक (मुस्लिम-झुग्गीझोपड़ी) एक-सा ही है। आदर्श नगर सीट पर ऐसा 2013 के विधानसभा चुनाव में हो भी चुका है। इसके अलावा भाजपा जिस तरह से सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) पर एग्रेसिव रुख अपना रही है। उससे तो यही लगता है कि भगवा दल हिन्दू वोटों का धु्रविकरण करना चाहता है। अब इसमें उन्हें कितनी कामयाबी मिलेगी, ये तो भविष्य के गर्भ में है। अब तक ये सब जानने और समझने के बाद, एक बात तो आपको बखूबी समझ आ गई होगी कि आदर्श नगर की सीट हमेशा से भाजपा के लिए मुश्किल रही है। भाजपा यहां तभी जीत सकती है, जब मुकाबला त्रिकोणीय और मजबूत उम्मीदवारों के बीच हो। इस लिहाज से तो भाजपा वालों के लिए ये स्थिति सोने पर सुहागा साबित हो सकती है।

समीकरणों और परिस्थितियों को मद्देनजर रखने के बाद आदर्श नगर की सीट पर जो भी पार्टी झुग्गीवालों और मुस्लिमों को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहेगी, जीत उसी की होगी?

चुनाव में आखिरी दिनतक समीकरण बनते-बिगड़ते हैं। अभी चुनाव में काफी दिन बाकी हैं। अब ये देखना काफी दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा।