धान खरीदी मामला: अपनी सियासी चाल में फंसी भूपेश सरकार, भाजपा और जकांछ का हमला

नई दिल्ली।एएनएन (Action News Network)​

धान खरीदी मामले को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। लेकिन अब 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान खरीदी के मामले पर कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार घिरती नजर आ रही है। प्रदेश कांग्रेस सरकार के त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से ठीक पहले किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोल के बीच भूपेश सरकार द्वारा जारी 1835 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का आदेश सामने आया है।

राज्य सरकार ने छतीसगढ़ में 1 दिसंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जारी आदेश में कहा है कि कॉमन धान 1815 रुपये प्रति क्विंटल तो ए ग्रेट का धान 1835 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीदा जाए। अब अपने ही आदेश को लेकर भूपेश सरकार चौतरफा घिर गई है।
नए आदेश को लेकर बीजेपी और जकांछ पार्टी ने भूपेश सरकार पर निशाना साधा है। बीजेपी ने कहा है कि सरकार ने 2500 का वादा किया था तो उतने पैसे में ही धान खरीदी करे।

बीजेपी ने कहा है कि इस आदेश में धान का जो मूल्य दिख रहा है वह किसानों के साथ छल है। वहीं, जकांछ पार्टी ने इसे कांग्रेस सरकार द्वारा किसानों को महाधोखा करार दिया है। अमित जोगी ने इस मामले पर शुक्रवार को कहा कि भूपेश सरकार ने किसानों को अपने जन घोषणा पत्र में किए गए मुख्य वादे से मुकरने की खुले आम घोषणा कर दी है। किसानों का धान 1 नवम्बर की जगह 1 दिसम्बर 2019 से खरीदने के अलावा अब सरकार धान का समर्थन मूल्य 2500 की जगह मात्र 1815 प्रति क्विंटल देने जा रही है।

इस से छत्तीसगढ़ के 70 लाख किसानों को 58,07,99,97,500 करोड़ का प्रत्यक्ष रूप से नुकसान होगा जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी भूपेश सरकार की है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी के घोषणा पत्र में दावा किया ता कि वह सत्ता में आने पर किसानों से 2500 प्रति क्विंटल की दर से ही धान खरीदी करेगी। इसी मुद्दे पर भूपेश सरकार राज्य में जल्द होने वाले त्रिस्तरीय चुनावों से ठीक पहले केंद्र सरकार के खिलाफ किसान आंदोलन करने जा रही है। जिसके तहत 15 नवंबर को दिल्ली में हजारों की संख्या में धरना प्रदर्शन किया जाएगा।