इस Popular Fashion Designer ने कभी की थी खुदकुशी की कोशिश

बॉलिवुड के चहेते फैशन डिजाइनर सब्ससाची मुखर्जी का नाम यूं तो कई मौके पर सामने आता है। चाहे बॉलिवुड ऐक्ट्रेसेस की ग्रैंड वेडिंग हो या फिर कोई इवेंट, सब्यसाची के डिजाइनर ड्रेसेज से उनकी चमक बढ़ जाती है। हालांकि, सब्यसाची बहुत निजी शख्स रहे हैं और अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में कम ही बोलते हैं।

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खुदकुशी की कोशिश

सब्यसाची बिना किसी हिचक के अपनी मेंटल हेल्थ पर खुलकर बोले और बताया कि एक बार उन्होंने खुदकुशी की कोशिश भी की थी। ‘मैं 17 साल का था जब डिप्रेशन में चला गया था, मैंने खुदकुशी करने की कोशिश भी की थी। लेकिन नाकाम रहा।’

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इंस्टाग्राम पोस्ट पर हुआ विवाद
अगर आप किसी महिला को ओवरड्रेस, हैवी मेकअप, गहनों से सजा धजा देखते हैं तो इस बात के आसार काफी ज्यादा हैं कि वह घायल हो। भीतर से जख्मी…बहते हुए खून के साथ…चुपचाप।’ इन शब्दों के साथ मशहूर डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी ने ओवरड्रेस्ड महिला की तुलना भावनात्मक तौर पर जख्मी औरत के साथ की थी। इसी साल लिखी गई उनकी यह इंस्टाग्राम पोस्ट वायरल हो गई थी और उनपर सेक्सिस्ट होने जैसे इल्जाम लगे थे।

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डिप्रेशन से निपटने के लिए कपड़ों का लिया सहारा
सब्यसाची ने इस पोस्ट पर माफी मांग ली थी। उन्होंने लिखा कि उस पोस्ट का असली मतलब यह था कि लोग जागरूक हों और अन्य लोगों की कपड़ों की चॉइस आदि के प्रति जजमेंटल न हों। हो सकता है इससे उनका भीतरी दुख प्रकट हो रहा हो।

उन्होंने अपना खुद का उदाहरण भी दिया कि जब वह टीनएजर थे और डिप्रेशन का शिकार हो गए थे। वह कहते हैं, ‘मैंने अपनी उग्र कपड़ों की पसंद में उससे बचने का रास्ता निकाल लिया था। मुझे बुली किया जाता था, मजाक बनाया जाता था, पर उससे ही मुझे मेरा रास्ता चुनने में मदद मिली थी।’

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मैडोना से थे प्रेरित
सब्यसाची बताते हैं, ‘मुझे लगता है कि बहुत सारे क्रिएटिव लोग खुद को एक्सप्रेस नहीं कर पाते हैं। मैं क्रिएटिव था लेकिन पढ़ाई की गलत धारा में था। मैंने मेडिसन की पढ़ाई की, फिर इकोनॉमिक्स और मुझे पता नहीं था कि मुझे करना क्या है।’ वह कहते हैं कि जब मैं उग्र कपड़े पहनने लगा तो अपना रास्ता मिला। ‘सेल्फ-एक्सप्रेशन से मुझे अपने अंदर के फ्रस्ट्रेशन से निपटने में मदद मिली। मैं अपने बाल रंगने लगा, जैसे नांरगी रंग के, जींस फटी हुई पहनने लगा जिसमें सेफ्टी पिन लगी होती थीं। यह मैडोना से प्रेरित था।’

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अपने जैसे लोगों को ढूंढें
सब्यसाची मानते हैं कि तब उन्हें खुदकुशी से रोकने वाला सपॉर्ट सिस्टम नहीं था। वह कहते हैं, ‘अकेलेपन की वजह से आपको लगता है कि शायद मैं अकेला हूं जो इससे गुजर रहा हूं लेकिन जब आप उस कम्युनिटी तक पहुंचते हैं तो पता चलता है कि आप अकेले नहीं हैं। मुझे लगता है कि अब मेंटल हेल्थ को लेकर बहुत बातचीत हो रही है। हर कोई ऐसी कम्युनिटी खोज सकता है कई बार ऑफलाइन तो कुछ ऑनलाइन हैं।’

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मेरे डिप्रेशन ने मुझे रास्ता दिखा दिया
आज की फटाफट भागती जिंदगी में मेंटल हेल्थ पर बात करना और जरूरी है। लोगों को समझना होगा कि इसमें डरने या शर्माने की जरूरत नहीं है। यह बिल्कुल सामान्य बात है।’ साल 2017 के कॉन्क्लेव में सब्यसाची ने डिप्रेशन की तुलना कॉमन कोल्ड से की थी। वह बताते हैं, ‘मेरे डिप्रेशन ने मुझे रास्ता दिखा दिया, नहीं तो भारत मुझे खो देता और मैं गूगल जैसी किसी कंपनी में सेन फ्रांसिसको में बैठा होता।’

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मैं बहुत क्रिएटिव हूं और काम बहुत है
सब्यसाची मानते हैं कि अब भी उन्हें डाउट या फ्रस्ट्रेशन के पलों का सामना करना पड़ता है लेकिन ये वैसा गंभीर मसला नहीं रहा जैसा कभी था। ‘अब ऐसा कम होता है, मैं बहुत क्रिएटिव हूं और काम बहुत है।’ तो क्या अब काम की थकान होती है डिप्रेशन नहीं? डाउट वाले वक्त से कैसे निपटते हैं? वह कहते हैं, ‘खाना’। मैं बंगाली हूं और खाने से बहुत प्यार करता हूं, थोड़ा ज्यादा सोने को मिल जाए तो मैं खुश हो जाता हूं।’