उत्तराखण्ड: व्रतियों ने अस्ताचल सूर्य को दिया अर्घ्य

देहरादून। एएनएन

बिहार और पूर्वांचल के लोगों की लोक आस्था के महापर्व छठ के तीसरे दिन शनिवार शाम उत्तराखण्ड की राजधानी द्रोणनगरी सहित प्रदेश के नदी, तालाबों, नहरों पर बने घाटों पर छठ व्रतियों ने 36 घंटे के निर्जला उपवास के साथ ही डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर आर्शीवाद मांगा। इस दौरान छठ घाटों पर उत्सव और आस्था का माहौल दिखाई दिया। रविवार को उगते सूरज को अर्घ्य देकर व्रत का समापन के साथ पारण होगा। प्रदेश के राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने छठ पर्व की राज्यवासियों को शुभकामनाएं दी है।

देहरादून: बिहारी महासभा की ओर से लगाए गए शिविर।

राजधानी देहरादून में जगह-जगह कार्तिकी छठ पूजा का आयोजन किया गया। धरती के साक्षात देव सूर्य की उपासना का चार दिवसीय छठ पर्व की व्रती महिलाओं ने भगवान भास्कर को अघ्र्य देने के लिए बांस के सूप में व्रतियों ने फल व सब्जियों को सजाया और पूरी-प्रसाद को टोकरी में रख छठ पूजा के लिए घाटों पर पहुंचे। देहरादून में पहाड़ की गोद में विराजमान तमसा नदी के पवित्र जल में खड़े होकर सूरज को अर्घ्य देकर मन्नत मांगी। मान्यता है कि भगवान टपकेश्वर के कलकल बहती टोंस नदी जो द्वापर युग में तमसा नदी के नाम से प्रसिद्ध था। इसके साथ ही जिले के मालेदवता, रायपुर, प्रेमनगर, चंद्रबनी, रिस्पना, बलबीर रोड, नंदा की चौकी, ब्रह्मपुरी, दीपनगर, रायपुर आदि जगहों पर बहुतायत में श्रद्धालुओं ने अस्ताचल गामी भगवान भाष्कर को अ‌र्घ्य दिया।

घरों के आंगन से निकल कर घाटों पर जाते समय यमश व्रतियों का आस्था और सेवा समपर्ण का उत्सवी रंग देखते ही बन रहा था। घाट पर व्रतियों ने मिट्टी से बेदी बनाकर दीप जलाए। फिर सभी व्रती पानी में जाकर खड़े हो गए और सूर्यदेव अस्तांचल की ओर बढ़ने लगे। कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकति, छठी मइया., सुनि लेहु अरज हमार हे छठी मइया जैसे पारंपरिक गीतों की गुंज मन को मोह रहा था। रास्तों पर बजते गीतों को स्थानीय लोग भी पूरी श्रद्धा के साथ देख व सुन रहे थे।

शहर का मुख्य आयोजन बिहारी महासभा की ओर से टपकेश्वर मंदिर परिसर में किया गया। जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। ​बिहारी महासभा के अध्यक्ष ललन सिंह और सचिव चंदन झा ने बताया कि समिति की व्रतियों को सुविधा के लिए मार्ग पर आने जाने का रास्ता के साथ लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही अर्घ्य देने के लिए दूध भी उपलब्ध कराया जा रहा है। महि​लाओं को कपड़ा बदलने के लिए अन्य त्यौहार से संबंधित विषयों में ध्यान में रखकर व्यवस्था किया गया है। इसके साथ ही शहर के साथ प्रदेश के अन्य स्थानों से गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया गया है।

निर्जला उपवास 36 घंटे का
इस पर्व पर श्रद्धालु 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं। छठ मैय्या की आराधना के लिए व्रत के बहुत कठोर नियम है। व्रत में शुद्धता और पवित्रता का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। छठ के दूसरे दिन यानी खरना की शाम को व्रती पूजा कर प्रसाद ग्रहण करते हैं। उसके बाद वह सीधे छठ के चौथे दिन यानी उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही अन्न जल ग्रहण करते हैं। इस व्रत में महिलाओं के साथ साथ पुरुष वर्ग उपवास रखकर व्रत को पूरा रखते हैं।