नौजवानों को भा सकती है ‘ये साली आशिकी’

बैनर : अमरीश पुरी फिल्म्स, पेन इंडिया लिमिटेड 
निर्माता : राजीव अमरीश पुरी, डॉ. मीना राजीव पुरी, धवल जयंतीलाल गड्डा, अक्षय जयंतीलाल गड्डा 
पटकथा : वर्धन पुरी, चिराग़ रूपारेल 
निर्देशन : चिराग़ रूपारेल 
कलाकार : वर्धन पुरी, शिवालिका ओबराय, जैसी लिवर, रुसलान मुमताज आदि 

प्यार, धोखा, बदला मूल स्वर है फ़िल्म ‘ये साली आशिक़ी’ का, लेकिन कहानी रहस्य रोमांच वाली है। यानि सस्पेंस थ्रिलर। इस फ़िल्म से स्टार सन नहीं बल्कि स्टार ग्रैंडसन को इंट्रोड्यूस किया गया है। अमरीश पुरी के पोते वर्धन पुरी की डेब्यू है यह। 

शिमला में होटल मैनेजमेंट कर रहे साहिल (वर्धन पुरी) पहली नजर में ही अपनी सहपाठिनी मिति (शिवालिका ओबराय) को दिल दे देते हैं। मिति  को भी कोई एतराज नहीं है। लेकिन यह आम हिंदी फिल्मों की ‘लैला’ टाइप प्रेमिका नहीं है। उसका मकसद तो सिर्फ अमीर लड़के का आर्थिक शोषण करना है। साहिल लंबे समय तक मिति द्वारा दिये जा रहे धोखे को समझ नहीं पाता है और जब तक वह समझता तब तक वह मेन्टल असायलम में पहुंच चुका होता है। इसके बाद कहानी में कई ट्विस्ट और टर्न आते हैं और साहिल बदला लेने में कामयाब हो जाता है। 

चिराग रूपारेल और वर्धन पूरी की स्क्रिप्ट में कई झोल हैं। रहस्य बनाने की कोशिश तो हुई है बात पहले ही समझ में आ जाती है। इंटरवल तक फ़िल्म की गति बहुत सुस्त है। हां, इंटरवल के बाद गति पकड़ती तो है लेकिन लेकिन घटनाओं में कोई तार्किक तालमेल नहीं बन पाता। इसी कहानी पर चुस्त पटकथा लिखी जा सकती थी। खैर, चिराग रूपारेल नए निर्देशक हैं उन्होंने अपनी ओर से मौजूदा ट्रेंड से कुछ अलग बनाने की कोशिश की है। कुछ हद तक सफल भी हुए हैं। 

अभिनय की बात करें तो वर्धन पुरी रोमांस और इमोशनल सीन्स में बेहद कमजोर दिखे हैं। लेकिन नेगेटिव शेड्स को उभारने में उन्हें सफलता मिली है। रुसलान मुमताज के लिए कुछ खास था नहीं। जॉनी लीवर के पुत्र जेसी लिवर भी इस फ़िल्म में हैं वे अपनी छोटी सी भूमिका में सहज लगे हैं। शिवालिका को भी आगे बढ़ने लिए बहुत मिहनत करने की जरूरत होगी। बाकी के कलाकार खानापूर्ति के लिए रखे गए हैं। गीत संगीत का स्तर सामान्य है। थोड़े और कसे हुए संपादन की जरूरत थी। नई पीढ़ी के नौजवानों को फ़िल्म पसंद आ सकती है।