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बांद्रा घटना में गिरफ्तार विनय दुबे को परिवार वाले बता रहे निर्दोष

बांद्रा घटना में गिरफ्तार विनय दुबे को परिवार वाले बता रहे निर्दोष
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  • गांव के पूर्व प्रधान ने कहा, वह अति महत्वाकांक्षी है लेकिन गलत नहीं

  • मुम्बई में उत्तर भारतीयों का बड़ा सियासी चेहरा बनना चाहता है विनय

  • उसके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची गई, फंसाया गया

भदोही । एएनएन (Action News Network)

पूर्वांचल का भदोही इन दिनों मुम्बई के बांद्रा कांड के बाद से चर्चा में है। लॉकडाउन के दौरान मुम्बई के बांद्रा रेलवे स्टेशन पर भीड़ जुटाने के आरोप में जिस विनय दुबे को गिरफ्तार किया गया है, वह भदोही के हैं। गिरफ्तारी की खबर सुनने के बाद परिवार वालों को भरोसा नहीं हो रहा है। उसके बड़े पिता भी इसे विनय के खिलाफ साजिश मानते हैं और उनका कहना है कि उसे फंसाया गया है। सप्ताह भर पूर्व विनय ने अपने पिता जटाशंकर दुबे के साथ जाकर कोरोना फंड में पच्चीस हजार रुपये की सहायता दी है। उस मौके की तस्वीर को महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने खुद ट्वीट किया है।

विनय के बड़े पिता रविशंकर दुबे कहते हैं कि वह नई मुम्बई में रहता है फ़िर बांद्रा कैसे पहुंचेगा। उसे पुलिस ने एरोली से गिरफ्तार किया है। यह सब सोची समझी रणनीति है क्योंकि विनय के बढ़ते प्रभाव से लोग जलन रखते हैं। उत्तर भारतीयों और प्रवासी मजदूरों में उसका अच्छा प्रभाव है। यह सब कैसे हुआ, कुछ समझ में नहीं आया, लेकिन विनय ऐसा नहीं है। उस पर लगे आरोप गलत हैं। विनय का पूरा परिवार मुम्बई रहता है। वह लोग किसी ज़रूरत या मांगलिक कार्यक्रम में पांच-दस दिन लिए गांव आते हैं।

मुम्बई में गिरफ्तार विनय दुबे भदोही जिले के औराई के हरिनारायणपुर गांव का रहने वाला है। उसके पिता दो भाई हैं। बड़े पिता रविशंकर दुबे गांव में रहते हैं जबकि पिता जटाशंकर दुबे मुम्बई में ऑटो चलाते थे। विनय चार भाईयों में सबसे बड़ा है। उसके अलावा अजय, अभय और निर्भय हैं। दो भाई इंजीनियर हैं। विनय मुम्बई में उत्तर भारतीय पंचायत नाम से संगठन चलाते हैं। वह बेहद महत्वाकांक्षी व्यक्ति है।

हरिनारायणपुर के पूर्व ग्राम प्रधान जय प्रकाश दुबे ने बताया कि विनय बेहद होनहार लड़का है। वह गलत नहीं है। वीडियो में उसने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो गलत हो। हालांकि वह महत्वाकांक्षी और अतिउत्साही है जिसकी वजह से विनय दुबे मुम्बई के एरोली और वाराणसी से चुनाव भी लड़ चुके हैं। विनय की जिस फ़ेसबुक पोस्ट को प्रवासी मजदूरों को भड़काने वाला बताया जा रहा है, उसमें उसने महाराष्ट्र और केन्द्र सरकार को सामान्य चेतावनी दी है। विनय ने सरकार को पत्र लिखकर यूपी, बिहार, झारखंड के प्रवासी मजदूरों को भेजने की बात कही है।

बांद्रा रेलवे स्टेशन पर भीड़ जुटाने के आरोपी विनय दुबे की फ़ेसबुक वाल को खंगालने से पता चलता है कि उन्होंने 29 मार्च का एक वीडियो डाला है जिसमें उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिलकर आ रहा हूं। उनसे हमने आग्रह किया है कि 14 अप्रैल को लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद यूपी, बिहार, झारखंड के प्रवासी मजदूरों को भेजने की व्यवस्था की जाय। सरकार ऐसा नहीं कर सकती है तो हम खुद अपने पैसे से 40 बस भेजेंगे लेकिन सरकार की तरफ़ से इसका जवाब नहीं मिला। इस तरह के उन्होंने 06, 07, 08 और 11 अप्रैल को कई वीडियो जारी किये हैं।

फ़ेसबुक वाल पर 12 अप्रैल को डाले गए वीडियो में उन्होंने कहा है कि 14 अप्रैल को लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद प्रवासी मजदूरों को नहीं भेजा गया तो वह दिल्ली की तर्ज पर 20 अप्रैल तक पैदल मार्च करेंगे। विनय दुबे ने पिता जटाशंकर दुबे के साथ 10 अप्रैल को महाराष्ट्र सरकार के गृहमंत्री अनिल देशमुख के कार्यालय जाकर 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता कोरोना फंड के लिए दी थी जिसकी प्रशंसा खुद देशमुख ने अपने ट्विटर हैंडल पर फोटो डालकर की है।

उसके परिवार वाले सवाल उठा रहे हैं कि बांद्रा स्टेशन पर प्रवासियों की भीड़ पुलिस के सख्त पहरे के बाद कैसे जमा हुई। रेलवे ने लॉकडाउन में ऑनलाइन बुकिंग क्यों चालू रखी। भीड़ खाली हाथ क्यों थी। प्रवासी मजदूर खाली हाथ घर क्यों जाएगा। यूपी के लिए अधिकांश गाड़ियां कुर्ला से चलती हैं तो मजदूर बांद्रा में क्यों जुटे। विनय की गिरफ्तारी एक साजिश भी हो सकती है। अब इस साजिश में कौन शामिल है, यह जांच का विषय है।

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