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झारखंड

शुद्ध पेयजल को तरस रहा आदिम जनजाति पहाड़िया गांव

शुद्ध पेयजल को तरस रहा आदिम जनजाति पहाड़िया गांव
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पाकुड़। एक्शन इंडिया न्यूज़

लिट्टीपाड़ा प्रखंड का आदिम जनजाति पहाड़िया गांव मासधारी के लोग आज भी पहाड़ की तलहटी में बने झरना के गंदा पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। फलस्वरूप कोई डेढ़ सौ की आबादी वाले इस गांव के लोग अक्सर अन्य बीमारियों के साथ ही जलजनित बीमारी से परेशान रहते हैं। वजह उक्त झरने से लोगों के अलावा जानवर भी अपनी प्यास जो बुझाते हैं। गाँव तक जाने को एक अदद सड़क तक नहीं बन पायी है आज तक। ग्रामीण पथरीली व उबड़ खाबड़ पगडंडी के सहारे ही आवागमन करते हैं।

लब्दाघाटी- कुंजबोना पीडब्ल्यूडी से गाँव को जोड़ने वाली महज दो किलोमीटर लंबी सड़क भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।जिस पर पैदल चलना भी कोई जंग जीतने से कम नहीं है।ग्रामीण बमड़ा पहाड़िया, सुंदरा पहाड़िया, रामा पहाड़िया, बमड़ी पहाड़िन के साथ ही ग्राम प्रधान बैदा पहाड़िया आदि ने बताया कि जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक उपेक्षा के चलते हमलोग गंदे झरने का पानी पीने को मजबूर हैं। इसके लिए कई बार पंचायत से लेकर प्रखंड कार्यालय तक में आवेदन दिया।

लेकिन कोई हमारी सुनता ही नहीं है। इस संबंध में हमलोगों ने विधायक को भी कहा लेकिन सिवा आश्वासन के कुछ नहीं मिला।उल्लेखनीय है कि लिट्टीपाड़ा विधान सभा क्षेत्र झारखंड मुक्ति मोर्चा का गढ़ माना जाता है।विगत चालीस वर्षों से भी ज्यादा समय से यहाँ वही काबिज है।वह भी एक ही परिवार।पहले साइमन मरांडी फिर उनकी पत्नी स्वर्गीया सुशीला हांसदा और वर्तमान में उनके पुत्र दिनेश विलियम मरांडी यहाँ से विधायक हैं। यही हाल गांव तक पहुंचने वाली सड़क का है।

वर्षों पहले बनवायी गई यह ग्रामीण सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।जिस पर संभल कर न चले तो गिरना निश्चित है।ग्राम प्रधान बैदा पहाड़िया ने बताया कि कोई साल भर पहले प्रशासन द्वारा गाँव में बोरिंग करवाया गया है।लेकिन आज तक टंकी नहीं बनाया गया है।उन्होंने कहा कि बोरिंग हुई तो हमें लगा कि शुद्ध पेयजल का हमारा सपना जल्द ही साकार होगा।लेकिन टंकी की तरह ही वह भी अधूरा है।उधर बीडीओ संजय कुमार ने खुद के नव पदस्थापित होने के हवाले से कहा कि ग्रामीण इस संबंध में आवेदन दें मैं संबंधित विभागीय अधिकारियों से मिलकर यथाशीघ्र शुद्ध पेयजलापूर्ति करवाने का प्रयास करूंगा।

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