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अस्पताल प्रबंधन के आगे उपद्रवियों ने घुटने टेके, नुकसान का भरा हर्जाना

अस्पताल प्रबंधन के आगे उपद्रवियों ने घुटने टेके, नुकसान का भरा हर्जाना
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रामगढ़ । एक्शन इंडिया न्यूज़

जिले के सबसे बड़े अस्पताल द होप हॉस्पिटल में उपद्रव मचाने वाले लोगों ने प्रबंधन के आगे घुटने टेक दिए। 30 घंटे से भी अधिक समय तक ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच वार्ता चली। माफीनामा और नुकसान का 10 हजार रुपए हर्जाना भरकर मामला रफा-दफा किया गया। सोमवार की शाम उन लोगों को भी थाने से घर भेजा गया, जिन्हें अस्पताल में तोड़फोड़ करने के मामले में हिरासत में लिया गया था। उपद्रवियों ने जब माफीनामा लिख कर दिया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से डॉ शरद जैन ने भी कुज्जू ओपी को कार्रवाई नहीं करने को लेकर समझौता पत्र दिया गया।

विदित हो कि रविवार की सुबह रामगढ़ थाना क्षेत्र के फुलसराय बस्ती के ग्रामीणों ने एक मरीज़ याक़ूब अंसारी की मौत हो जाने पर उग्र होकर द होप हॉस्पिटल में तोड़फोड़ किया था। जिससे अस्पताल का काफी नुकसान हुआ था। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने इसकी शिकायत एसपी से की। एसपी प्रभात कुमार ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए दोषियों पर कार्रवाई करने का निर्देश कुज्जु ओपी प्रभारी को दिया। कुज्जु पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल में तोड़फोड़ में शामिल दो लोगों को हिरासत में लिया। उनके अलावा जितने लोग इस मामले में शामिल थे, उनके संबंध में सख्ती से पूछताछ की जाने लगी।

पुलिसिया कार्रवाई के बाद ग्रामीणों को इस बात का एहसास हुआ कि उनसे आवेश में बहुत बड़ा अपराध हो गया है। इसके बाद सभी ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से यह निर्णय लिया कि उन्हें अस्पताल प्रबंधन से संयुक्त रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए। रविवार की शाम को ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच शुरू हुई वार्ता सोमवार को खत्म हुई। अस्पताल प्रबंधन ने ग्रामीणों की बातों को गम्भीरता से लेते हुए तथा ऐसी घटना फिर कभी दोबारा न करने की शर्त पर ग्रामीणों को माफ़ कर दिया।

अस्पताल में इलाजरत फुलसराय निवासी याक़ूब अंसारी (25 वर्ष) की मौत रविवार हो गई थी। ग्रामीणों एवं मरीज़ के परिजनों को यह ग़लतफ़हमी हो गई कि इलाज में लापरवाही के वजह से उसकी मृत्यु हुई है। इसके बाद गांव के सैकड़ों लोग हॉस्पिटल पहुंचे और बवाल शुरू कर दिया। हॉस्पिटल के संस्थापक सदस्य डॉक्टर शरद जैन ने बताया कि याक़ूब अंसारी का इलाज उनके द्वारा किया जा रहा था। उसके इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई।

दरअसल मृतक सिकलिन नामक रोग से ग्रसित था। इसी बीमारी के वजह से उसकी मृत्यु हुई है। लेकिन लोगों को यह ग़लतफ़हमी हो गई कि इलाज में लापरवाही के कारण उसकी मौत हुई है। बाद में मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद ग्रामीणों को यह एहसास हुआ कि उनसे जानकारी के आभाव में यह ग़लती हुई है। इसके बाद ग्रामीणों ने लिखित रूप से मुझसे माफ़ी मांगी और मैंने उन्हें माफ़ी दे दी।

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