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जनगणना में वनवासी बंधुओं का 'हिन्दुत्व' बचाये रखने के लिए कल्याण आश्रम चलाएगा अभियान

जनगणना में वनवासी बंधुओं का हिन्दुत्व बचाये रखने के लिए कल्याण आश्रम चलाएगा अभियान
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उदयपुर । एक्शन इंडिया न्यूज़

आसन्न जनगणना में वन में रहने वाले वनवासी बंधुओं के हिन्दुत्व को बचाये रखने के लिए वनवासी कल्याण आश्रम पूरे देश में जनगणना जागरूकता अभियान चलाएगा। साथ ही, जनजाति समाज के उत्थान के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाले बिरसा मुण्डा जैसे आदर्श को भारत रत्न के रूप में सम्मानित किए जाने के लिए भी अभियान चलाया जाएगा।

यह जानकारी अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के नए अध्यक्ष रामचंद्र खराड़ी ने सोमवार को यहां उदयपुर स्थित वनवासी कल्याण परिषद के कार्यालय में दी। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उदयपुर पहुंचे खराड़ी ने यहां प्रदेश भर के चुनिंदा कार्यकर्ताओं की बैठक में आश्रम की आगामी गतिविधियों की जानकारी दी और कार्यकर्ताओं को इस अभियान में जुटने का आह्वान किया। गौरतलब है कि खराड़ी मूलत: उदयपुर संभाग के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले हैं। राजकीय सेवा से स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर वे पहले गायत्री परिवार और फिर वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़ गए थे। वे वनवासी कल्याण आश्रम के तीसरे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

खराड़ी ने कहा कि जनगणना में अदर रिलीजन पर्सन (ओआरपी) का कॉलम बनाकर उन्हें हिन्दू धर्म से विलग करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है जिस पर जागरूकता के लिए जनजाति समाज में अभियान चलाया जाएगा। जनजाति समाज हिन्दू समाज का अभिन्न अंग है और जनजाति समाज को हिन्दू समाज से दूर कर उन्हें अल्पसंख्यक बनाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है, ताकि बाद में इससे भी आगे बढ़ते हुए षड्यंत्रपूर्वक जनजाति समाज का धर्म परिवर्तन कराया जा सके, अभियान के तहत इस पूरी बात को जनजाति समाज तक पहुंचाते हुए उन्हें ऐसी बरगलाने वाली ताकतों से दूर रहने का आग्रह किया जाएगा।

खराड़ी ने बताया कि आश्रम ने अपने प्रस्ताव में पूरे देश में बिरसा मुण्डा जयंती को सात दिवसीय आयोजनों के रूप में मनाए जाने का निर्णय किया है। बिरसा मुण्डा की जयंती 15 नवम्बर को है। इस दिन को जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाया जाएगा। वनवासी कल्याण आश्रम जनजाति संस्कृति के लिए सर्वस्व समर्पित करने वाले बिरसा मुण्डा के लिए भारत रत्न प्रदान किए जाने का भी प्रयास कर रहा है।

खराड़ी ने बताया कि आश्रम ने सरकार से मांग की है कि पूरे देश में जनजाति समाज के आराध्य स्थलों, आस्था केन्द्रों की सुरक्षा की व्यवस्था सरकारी स्तर पर की जाए। उनके पुजारियों के लिए मानदेय की व्यवस्था भी सरकार करे।

पूर्व सांसद डॉ. कार्तिक उंराव ने जनजाति आरक्षण में एक उपबंध लगाने की सिफारिश की थी जिसमें 348 सांसदों ने सहमति हस्ताक्षर किए थे। इस उपबंध में यह शामिल किया जाना है कि जनजाति समाज में उनकी मूल संस्कृति को छोडक़र अन्य धर्मों का पालन करते हैं, उन्हें आरक्षण से वंचित किया जाए। वर्ष 1970 में इतनी बड़ी संख्या में सांसदों की सहमति होने के बावजूद इस उपबंध को संसद में पारित नहीं कराया गया, इंदिरा गांधी सरकार ने इसे तब संसद के तत्कालीन संत्र के अंतिम दिन के लिए सूचीबद्ध करने की बात कही, लेकिन उससे पहले ही इंदिरा की सरकार चली गई। इस उपबंध को पारित कराने के लिए कल्याण आश्रम राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर रहा है।

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