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मास्टर भंवरलाल की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन, कई मंत्रियों ने दी श्रद्धांजलि

मास्टर भंवरलाल की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन, कई मंत्रियों ने दी श्रद्धांजलि
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चूरु । एक्शन इंडिया न्यूज़

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मास्टर भंवरलाल मेघवाल की पार्थिव देह मंगलवार को चूरू जिले के सुजानगढ़ में पंचतत्व में विलीन हो गई। सुजानगढ़ के मोक्षधाम में मास्टर भंवरलाल मेघवाल का अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले उनकी पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए उनके निवास पर रखी गई। यहां परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा समेत कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने पहुंच अंतिम नमन किया। भाजपा के उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, युनुस खान समेत विपक्ष के कई नेताओं ने उन्हें नमन किया।

मास्टर भंवरलाल की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। उनकी अंतिम यात्रा पर जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। मंत्री के निधन पर सुजानगढ़ बंद रहा। प्रदेश में एक दिन का राजकीय अवकाश रखा गया। सरकारी दफ्तरों में अवकाश रहा। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहे। 72 साल के मेघवाल का सोमवार को गुडग़ांव के मेदांता में निधन हो गया था। कई महीनों से उनकी तबीयत खराब थी। मेघवाल राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज दलित नेताओं में शामिल थे।

वे पिछले करीब 41 साल से राजनीति में सक्रिय थे। सुजानगढ़ विधानसभा सीट से निर्दलीय समेत कांग्रेस के टिकट पर वे 5 बार 1980, 90, 98, 2008 और 2018 में विधायक चुने गए। उनके एक बेटा व दो बेटी हैं। एक बेटी बनारसी देवी राजनीति में सक्रिय थीं। वे चूरू की जिला प्रमुख भी रही थीं।

उनका 29 अक्टूबर को निधन हो गया था। जबकि भंवरलाल के इकलौते बेटे मनोज व्यवसाय करते हैं। स्व. मेघवाल ने 10 बार चुनाव लड़ा। इनमें से वे पांच चुनाव जीते और पांच चुनाव हार गए। पिछली बार अशोक गहलोत की सरकार में कर्मचारियों व तबादलों पर राजनीतिक बयानों की वजह से चर्चित रहे मेघवाल शिक्षा मंत्री पद का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। उन्हें पद छोडऩा पड़ा था।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री रहे मास्टर भंवर लाल मेघवाल को सुबह 10.30 बजे गहलोत मंत्रीपरिषद की मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई गई बैठक में मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मंत्री परिषद में शोक प्रस्ताव पढ़ा गया और उन्हें 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

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