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केंद्र सरकार के कृषि कानून खिलाफ बिल लाकर गहलोत सरकार ने तोड़ा किसानों का रक्षा कवच - चौधरी

केंद्र सरकार के कृषि कानून खिलाफ बिल लाकर गहलोत सरकार ने तोड़ा किसानों का रक्षा कवच - चौधरी
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नई दिल्ली । एक्शन इंडिया न्यूज़

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने सोमवार को केंद्र की मोदी सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ कांग्रेस शासित राज्य पंजाब और छत्तीसगढ़ के बाद अब राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्‍तुत बिल को किसान विरोधी और देश विरोधी बताया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती किसानी को लाभ का सौदा बनाने के उद्देश्य से लाए कृषि सुधार कानूनों के क्रियान्वयन की राह में रोड़े पैदा करके कांग्रेस अपनी किसान विरोधी सोच को प्रदर्शित कर रही है। केंद्रीय मंत्री चौधरी ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपने नए बिलों में मंडी के बाहर किसानों से उनकी मर्जी और मनपसंद रेट पर धान खरीदने वाली कोई कंपनी या कॉरपोरेट व्यापारी पर इतनी भारी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया है कि कोई भी ऐसा करने की जोखिम नहीं उठाएगा।

इससे किसान को अपनी मनपसंद जगह और रेट पर धान बेचने का एकमात्र विकल्प वापस एपीएमसी मंडी ही रह जाएगा। किसानों के इस सीमित विकल्प और मजबूरी का फायदा दलाल उठाएंगे। राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने सोमवार को आवश्यक वस्तु और विशेष सेवाएं (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020, किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौते, आवश्यक 2020 और किसान सेवा (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 और किसानों को व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) और राजस्थान संशोधन विधेयक पेश किया।

केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के प्रभाव को राज्य में रोकने के लिए गहलोत सरकार द्वारा लाए गए इन विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि इससे किसानों की समस्याएं बढ़ेगी। मंडियों के बाहर खरीद करने वालों पर टैक्स अदा न करने के प्रावधान को हटाने से किसान अपनी मनपसंद जगह और रेट पर फसल नहीं बेच पाएगा। यह किसानों के मौलिक अधिकारों का हनन करने के साथ ही उन्हें हमेशा गरीब और गुलाम वोटबैंक बनाए रखने की कांग्रेस की ओछी मानसिकता को दर्शाता है। कांग्रेस ने ये बिल किसानों के भले के लिए नहीं आढ़तियों और दलालों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से पारित किए हैं।

किसानों के लुटेरे हमें हराने में लगे हुए हैं :-

चौधरी ने कहा कि राजस्थान में होने वाले पंचायतीराज चुनाव में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रहित और किसान कल्याण के लिए लाए गए नए कृषि सुधार कानून के कारण किसानों के सभी लुटेरे एक साथ मिलकर भाजपा को हराने में लगे हैं। लेकिन उनकी देश के लिए कोई विचारधारा ही नहीं है। इनमें अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिन्हें अपने निजी स्वार्थ की चिंता है। नए कृषि विधेयकों को किसानों का हितैषी बताते हुए कृषि राज्यमंत्री चौधरी ने कहा कि इससे देशभर में किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

साथ ही उन्हें बिचौलियों से आजादी मिलेगी। किसानों से झूठी हमदर्दी जताने वाले जो लोग इसको लेकर भ्रम फैला रहे हैं, उनसे सावधान रहने की जरूरत है। अब ये दुष्प्रचार किया जा रहा है कि केंद्र सरकार के द्वारा किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं दिया जाएगा। ये सरासर झूठ है, गलत है, किसानों को धोखा है।किसानों को अपनी उपज देश में कहीं पर भी, किसी को भी बेचने की आजादी देना, बहुत ऐतिहासिक कदम है. हमारी सरकार किसानों को एमएसपी के माध्यम से उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी खरीद भी पहले की तरह जारी रहेगी।

गहलोत सरकार ने किसानों का रक्षा-कवच तोड़ा :-

केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा पारित ऐतिहासिक कृषि सुधार विधेयकों ने हमारे अन्नदाता किसानों को अनेक बंधनों से मुक्ति दिलाई है, उन्हें आजाद किया है। इन सुधारों से किसानों को अपनी उपज बेचने में और ज्यादा विकल्प मिलेंगे, और ज्यादा अवसर मिलेंगे। लेकिन कुछ लोग जो दशकों तक सत्ता में रहे हैं, देश पर राज किया है, वो लोग किसानों को इस विषय पर भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, किसानों से झूठ बोल रहे हैं। किसान और ग्राहक के बीच जो बिचौलिए होते हैं, जो किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा खुद ले लेते हैं, उनसे बचाने के लिए ये विधेयक लाए जाने बहुत आवश्यक थे। ये विधेयक किसानों के लिए रक्षा कवच बनकर आए हैं।

बिचौलियों का साथ दे रही है कांग्रेस :-

कृषि राज्यमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में भारत का किसान, बंधनों में नहीं, खुलकर खेती करेगा। जहां मन आएगा अपनी उपज बेचेगा, किसी बिचौलिए का मोहताज नहीं रहेगा और अपनी उपज, अपनी आय भी बढ़ाएगा। कांग्रेस बिचौलियों का साथ दे रही हैं, ये लोग किसानों की कमाई को बीच में लूटने वालों का साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपना उत्पाद, दुनिया में कहीं भी बेच सकता है, जहां चाहे वहां बेच सकता है। लेकिन केवल मेरे किसान भाई-बहनों को इस अधिकार से वंचित रखा गया था।

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