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शहद खाने के बेहतरीन फ़ायदे, ऐसे करें असली शहद की पहचान

शहद खाने के बेहतरीन फ़ायदे, ऐसे करें असली शहद की पहचान
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अर्धतरल मीठा शहद मधुमखियों द्वारा अपने छते में एकत्रित किया जाता है जो अनेकों फलों एंवम फूलों के रस के मिश्रण से बना होता है. आयुर्वेद में मधु के फायदों का जिक्र मिलता है अनेकों औषधिय गुणों वाला शहद ख़ासकर ग्रामीण स्तर पर लोगों द्वारा खांसी से राहत पाने हेतु औषधि रूप में प्रयोग किया जाता रहा है.

शहद निकालने के लिए विशेष प्रशिक्षण आवश्यक माना गया है क्योंकि शहद जितना मीठा है उसकी रक्षा करती हुई मधुमखियों का डंक उतना ही खतरनाक है जिस स्थान पर डंक लगा हैं वहां तेज खुजली आने लगती है और त्वचा में सुजन दिखाई पड़ने लगती है जिन्हें ये लक्षण नजर न आए उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि कई बार ऐसा हुआ है की मधुमक्खी के डंक से रिएक्शन हो जाता है इसलिए तो कहते हैं की बिना प्रशिक्षण के शहद निकालने का प्रयास मूर्खतापूर्ण है.

मधुमखियों द्वारा विशेष फूलों के पौधों, लताओं और पेड़ों पर आने वाले फूलों के परागकणों को फैलाया जाता जाता जिससे लता एंवम पेड़ फल दे पाते हैं ऐसा नहीं है की मात्र मधुमखियों द्वारा ही ऐसा किया जाता है तितलियों द्वारा भी फलों के उत्पादन में सहयोग किया जाता है. कुछ ही दिनों में खेजड़ी के पेड़ पर फूल आएंगें जहाँ हजारों मधुमक्खियाँ इधर उधर से पहुंच जाती है. खेजड़ी का पेड़ रेतीली शुष्क भूमि में प्राय अधिक देखने को मिलते हैं. बता दें की खेजड़ी की फलियों को सांगरी कहते है जो सर्वाधिक महंगी सब्जियों की सूची में शामिल रही है.

बच्चों को शहद अति प्रिय होता है वे अंगुली पर थोड़ा सा शहद लगाकर उसे बड़े मज़े लेकर खाते हैं. शहद खाना गलत नहीं है किंतु कुछ बातों को अवश्य ध्यान में रखकर चलना चाहिए क्योंकि शहद खाने के पश्चात कुछ चीजों को खाने की मनाही होती है. ऐसा न करने पर स्वास्थ्य पर शहद के प्रतिकूल प्रभाव होने का डर बना रहता है शहद के कई प्रकार होते हैं जिनमें से कुछ ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रहते हैं इसलिए बुजुर्ग भी कहतें हैं की हमें डॉक्टर की सलाह से ही ऐसी चीजें खानी चाहिए.

निरंतर एनर्जी बनाए रखने में कारगर शहद इम्युनिटी सिस्टम के लिए बेहतर होता है. शहद का इस्तेमाल बेहतर नींद लाने हेतु दूध के साथ किया जाता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें की विशेषज्ञों की सलाह लेकर शहद के नियमित सेवन से भूख पर भी नियन्त्रण कसा जा सकता है. शहद के अतिरिक्त इसमें कई और भी सामग्री निश्चित अनुपात में मिलाकर चेहरे की त्वचा का निखार बरकरार रखा जाता है.

शहद प्रकृति का अमूल्य तौहफा है जिसे मनुष्य हजारों सालों से ग्रहण करता आया है कभी दवाई रूप में तो कभी भूख शांत करने हेतु. शहद की गुणवता उसे निकालने के तरीके पर भी निर्भर करती है जैसे की जंगली शहद अधिक समय तक सुरक्षित चुनौतीपूर्ण है जबकि मधुमक्खी पालन केंद के विशेषज्ञों द्वारा मशीनों की सहायता से निकाला गया शहद तरल शहद होता है जो अपेक्षाकृत अधिक समय तक सुरक्षित रहता है और खाने में भी अधिक सुरक्षित एंवम विश्वशनीय मान सकते हैं. बता दें की असली शहद पानी में डालने से पानी पर तेलीय परत नजर आती है और शहद पानी में नहीं घुलेगा.

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