
बाबा ग्रुप और सहयोगियों के ठिकानों से 4.50 करोड़ जब्त, कीमती जेवर बरामद
रांची.
झारखंड में बाबा ग्रुप के ठिकानों पर आयकर विभाग की कार्रवाई शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रही. झारखंड और बिहार में फैले बाबा ग्रुप और उनके सहयोगी आढ़त व्यापारियों के ठिकानों पर लगातार तलाशी ली जा रही है. यह छापेमारी 29 जनवरी से शुरू हुई थी, जो अब व्यापक जांच का रूप ले चुकी है. विभाग की कई टीमें एक साथ अलग-अलग स्थानों पर दस्तावेजों और संपत्तियों की पड़ताल कर रही हैं.
45 ठिकानों पर छापेमारी, 4.50 करोड़ नकद जब्त
आयकर विभाग की इस बड़ी कार्रवाई के दौरान अब तक कुल 4.50 करोड़ रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं. अधिकारियों के मुताबिक झारखंड और बिहार के करीब 45 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई. इनमें राइस मिल, आढ़त गोदाम, कार्यालय और निजी आवास शामिल हैं. तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से विभाग को कर चोरी के नेटवर्क के और पुख्ता सबूत मिलने की उम्मीद है.
बाबा एग्रो फूड और फूड प्रोसेसिंग पर फोकस
जांच के दौरान बाबा ग्रुप से जुड़ी कंपनियों बाबा एग्रो फूड और बाबा फूड प्रोसेसिंग के ठिकानों पर विशेष ध्यान दिया गया. इन दोनों इकाइयों से करीब 2.5 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए हैं. विभागीय सूत्रों के अनुसार, इनमें से 1.5 करोड़ रुपये बाबा एग्रो फूड से जुड़े योगेश साहू के ठिकाने से बरामद हुए. नकदी की इतनी बड़ी बरामदगी ने आयकर विभाग की शंकाओं को और मजबूत किया है.
आढ़त व्यापारियों से भी दो करोड़ रुपये बरामद
बाबा ग्रुप के अलावा उनके सहयोगी चावल आढ़त व्यापारियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई. इन स्थानों से लगभग 2 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए हैं. आयकर विभाग का मानना है कि इन आढ़त व्यापारियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर लेन-देन को छुपाया गया था. नकद लेन-देन, फर्जी बिलिंग और आय छिपाने के संकेत जांच में सामने आए हैं.
कीमती जेवर और अचल संपत्ति का मूल्यांकन जारी
छापेमारी के दौरान नकदी के अलावा कीमती जेवरात भी बरामद किए गए हैं. इन आभूषणों का फिलहाल मूल्यांकन किया जा रहा है. इसके साथ ही आयकर विभाग की टीमें बाबा ग्रुप से जुड़ी भूमि, कारखानों और अन्य अचल संपत्तियों का भी आकलन कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि संपत्तियों का सही मूल्यांकन होने के बाद कुल अघोषित संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ सकता है.
कर चोरी, बेनामी लेन-देन और फर्जी बिलिंग का शक
आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार बाबा ग्रुप और उनके सहयोगी कारोबारियों के खिलाफ कर चोरी, बेनामी लेन-देन और फर्जी बिलिंग की कई शिकायतें मिली थीं. जांच के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और लेन-देन से जुड़े डेटा भी जब्त किए गए हैं.
पीडीएस और सरकारी खरीद में गड़बड़ी की आशंका
सूत्रों का दावा है कि कुछ राइस मिलर्स और ट्रेडर्स ने सरकारी खरीद, पीडीएस और निजी सप्लाई से जुड़े कारोबार में बड़ी मात्रा में आय छिपाई है. आयकर विभाग का कहना है कि दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद अघोषित आय का वास्तविक आंकड़ा सामने आएगा. फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज हो सकती है.



