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राज्य के 11 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 267 असिस्टेंट प्रोफेसर घर बैठेंगे

राज्य के 11 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 267 असिस्टेंट प्रोफेसर घर बैठेंगे
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कोटा । Action India News

प्रदेश के 11 सरकारी व स्ववित्त पोषित इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढाने वाले 267 फैकल्टी का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त होने जा रहा है। लेकिन उच्च शिक्षा विभाग ने फैकल्टी की इस कमी को दूर करने के लिये कोई कदम नहीं उठाया है। इन इंजीनियरिंग कॉलेजों में 20 हजार से अधिक बीटेक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

आंकडों के अनुसार, वर्तमान में 10 जिलों के इन 11 इंजीनियरिंग कॉलेजों में मापदंडों के अनुसार, 1300 फैकल्टी नियुक्त होनी चाहिये। उसकी तुलना में 526 शिक्षक स्थायी हैं तथा 267 असिस्टेंट प्रोफेसर एमएचआरडी की टेक्यूप-3 योजना के तहत संविदा पर नियुक्त हैं। पिछले 3 वर्षों से टीचिंग सेवायें दे 267 फैकल्टी का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो जायेगा।

केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढाने के लिये 2017 में टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (टेक्यूप) प्रारंभ किया था, जिसके तहत एनआईटी से एमटेक योग्यताधारी शिक्षकों को संविदा पर नियुक्ति देकर विभिन्न आईआईटी से टीचिंग ट्रेनिंग दिलवाई गई थी।

एमएचआरडी नेशनल प्रोजेक्ट इम्पलीमेंटेशन यूनिट (एनपीआईयू) के बीच हुये एमओयू के अनुसार, राज्य सरकार ऐसे संविदा फैकल्टी को परफॉर्मेंस के आधार पर निरंतर रख सकती हैं। जिसके लिये टेक्यूप से राशि दी जाती है। इस प्रोजेक्ट के तहत सेवायें दे रहे असिस्टेट प्रोफेसर को 70 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है।

राज्य में बीटेक डिग्री की साख दांव पर

विशेषज्ञों ने बताया कि उच्च तकनीकी शिक्षा में छात्र शिक्षक का अनुपात 1ः20 को है, जबकि वर्तमान में 50 स्टूडेंट पर भी एक शिक्षक नियुक्त नहीं है। दूसरी ओर, प्रदेश में उच्च शिक्षित बेरोजगार डिग्रीधारी उपलब्ध हैं।

राजस्थान की उच्च तकनीकी शिक्षा में शिक्षकों की लगातार कमी होने से गुणवत्ता में निरंतर गिरावट आ रही है। यही कारण है कि बड़ी व मल्टीनेशनल कंपनियां प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कैम्पस भर्ती के लिये नहीं आ रही है। जिससे प्रतिवर्ष इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही है।

11 कॉलेजों के 20 हजार स्टूडेंट होंगे प्रभावित

फैकल्टी की कमी से यूसीई, आरटीयू, कोटा, गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, झालावाड, इजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर, वुमन इंजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर, यूसीईटी, बीटीयू, बीकानेर, एमबीएम जोधपुर, सीटीएई, उदयपुर, इंजीनियरिंग कॉलेज, बांसवाडा, भीलवाडा व भरतपुर में संविदा पर अध्यापन कर रहे 267 असिस्टेंट प्रोफेसर घर बैठ जायेंगे। जिससे इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स की पढाई ठप हो जायेगी।

गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रवेश सैनी ने कहा कि अब तक प्रतिवर्ष टीचिंग अनुभव का निष्पादन कर अगले एक साल के लिये हमारी नियुक्ति बढा दी जाती है। लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं हुआ है।

एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर संगीता चाहर ने कहा कि सभी संविदा फैकल्टी एनआईटी से बीटेक या एमटेक हैं, हमने आईआईटी में टीचर्स ट्रेनिंग भी ली है। प्रदेश के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के हित में फैकल्टी की कमी को तत्काल दूर करने के लिये कदम उठाने होंगे।

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