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45 दिनों बाद 1188 प्रवासी मजदूरों को लेकर बंगाल पहुंची पहली ट्रेन

45 दिनों बाद 1188 प्रवासी मजदूरों को लेकर बंगाल पहुंची पहली ट्रेन
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कोलकाता । एएनएन (Action News Network)

कोविड-19 से बचाव के लिए किए गए लॉकडाउन में राजस्थान में फंसे पश्चिम बंगाल के पर्यटकों, मजदूरों और अन्य नागरिकों को राज्य सरकार मंगलवार को वापस ले आई है। 1188 लोगों को लेकर पहली विशेष ट्रेन राजस्थान के अजमेर शरीफ स्टेशन से रवाना होकर पश्चिम बंगाल के हुगली जिला अंतर्गत दानकुनी स्टेशन पर मंगलवार सुबह तकरीबन 10:00 बजे पहुंची है।

खास बात यह है कि इस ट्रेन से लौटने वाले किसी भी यात्री से कोई भी किराया नहीं वसूला गया है। राजस्थान से लौटने वालों ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से वे वहां फंस गए थे और उन्हें लगता था कि शायद कभी भी सुरक्षित घर न पहुंच सकें। लेकिन स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के सहयोग से उनका लौटना संभव हो सका है। मजदूरों ने बताया है कि ट्रेन में उन्हें खाने और पानी की व्यवस्था की गई थी। इधर जैसे ही ट्रेन सुबह 10:00 बजे दानकुनी स्टेशन पर पहुंची, इन लोगों के स्वागत के लिए राज्य के श्रम मंत्री मलय घटक और कृषि विपणन मंत्री तपन दास गुप्ता मौजूद थे। मलय घटक ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहल पर इन सभी मजदूरों को वापस लाया गया है। इन्हें इनके घर जाने के लिए राज्य सरकार ने बसों की व्यवस्था की है।

राज्य पुलिस की ओर से बताया गया है कि राजस्थान से लौटे श्रमिक अधिकतर मुर्शिदाबाद और आसपास के क्षेत्रों के रहने वाले हैं। इन्हें घर पहुंचाने के लिए 64 बसों और 42 छोटी गाड़ियों का इंतजाम राज्य सरकार ने किया था। स्टेशन के बाहर ही ये सारी गाड़ियां लगी थीं। जैसे ही ये लोग ट्रेन से उतरे स्टेशन पर इनकी जांच रेलवे की ओर से की गई। रेल अधिकारियों ने बताया कि ट्रेनों में इनके बैठने की व्यवस्था भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को ध्यान में रखते हुए ही की गई थी और स्टेशन पर भी इन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उतारा गया है। ट्रेन का स्वागत राज्य के मंत्री और अधिकारियों ने फूल के साथ किया था।

उल्लेखनीय है कि रेलवे का 2 मई का एक आदेश वायरल हुआ था जिसमें विशेष ट्रेनों से लौटने वाले यात्रियों से किराया वसूलने को कहा गया था। इसे लेकर केंद्र सरकार की चौतरफा आलोचना हुई थी। इसके बाद रेलवे ने अपना निर्णय बदला है और अब यात्रियों से कोई किराया नहीं वसूला जा रहा है। राजस्थान से लौटे श्रमिकों ने भी इसकी पुष्टि की है।

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