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भारत के साथ 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता : आंखें बिछाए हुए है अमेरिका

भारत के साथ 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता : आंखें बिछाए हुए है अमेरिका
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लॉस एंजेल्स। एएनएन (Action News Network)

भारत-अमेरिका के बीच टू प्लस टू मंत्री स्तरीय वार्ता के लिए मेज़बान अमेरिका आंखें बिछाए हुए है। अमेरिकी विदेश विभाग में प्रवक्ता मोर्गन ओर्तगुस ढोल पीट पीट कर कह रही हैं कि यहां बुधवार, 18 दिसंबर को वाशिंगटन में अमेरिका और भारत के बीच टू प्लस टू मंत्री स्तरीय वार्ता हो रही है।

वह आगे कहती हैं कि आने वाले समय में दोनों देशों के सामरिक रिश्ते और अधिक मज़बूत होंगे।’ अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में एक वर्ष भी नहीं बचा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दूसरी आक्रामक पारी से भयभीत डेमोक्रेट नेताओं में खलबली मची हुई है। वे महाभियोग के नाम पर दुनिया भर की मीडिया में ट्रम्प को अमेरिका के इतिहास में तीसरे राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ महाभियोग लगा कर उन्हें छिछालेदार करने में जुटे हैं, तो सोमवार को एक ताज़ा नेशनल सर्वे में दिखाया जा रहा है कि वे राष्ट्रपति चुनाव में संभावित डेमोक्रेट उम्मीदवारों में जो बिडेन, बर्नी सैंडर्स, वारेन एलिज़ाबेथ और धन कुबेर ब्लूमबर्ग से तीन प्रतिशत से पांच प्रतिशत अंकों से आगे चल रहे हैं।

भारत और अमेरिका के बीच दूसरी 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर तथा भारत से विदेश मंत्री एस॰जय शंकर तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आमने सामने होंगे। भारत और अमेरिका के बीच एक दशक से द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार लाने की कवायद की जा रही थी, लेकिन ताज़गी नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा और फिर डोनाल्ड ट्रम्प के समय में आ पाई है। दोनों देशों के व्यापार में साढ़े बारह प्रतिशत की वृद्धि हुई, ग़ैर नाटो देशों में सऊदी अरब के बाद भारत अमेरिका से 18 अरब डॉलर के आयात के साथ रक्षा सामग्री लेने वाले देशों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

पिछले वर्ष सितंबर में पोंपियो और जिम मैटिस जब दो भारतीय महिला मंत्रियों सुषमा स्वराज और निर्मला सेतुरामन से मिलने दिल्ली आए थे, तब अमेरिका ने एशिया प्रशांत महासागर को नए नाम ‘हिंद प्रशांत महासागर’ के नाम से उच्चारित कर भारत से यह उम्मीद ज़ाहिर की थी कि वह अपनी सुरक्षा क्षमताओं में अपेक्षित सुधार करते हुए केवल दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में ही नहीं,बल्कि हिंद प्रशांत महासागर में भी चीन के बढ़ते प्रभाव पर नजर ररखेगा। इसके लिए कम्यूनिकेबल कम्यमुनिकेशन कंपेटिबिलिटी एंड सिक्यूरिटी एग्रीमेंट (कोमकोसा-2018) पर सहमति तो हो गयी, लेकिन काउंटरिंग अमेरिका एडवरसरीज थ्रू सेंक्शन एक्ट (कटेसा) पर भारतीय संशय के कारण सहमति नहीं हो पाई।

गुट निरपेक्षता और सात दशक तक रूस के साथ सैन्य संबंधों के कारण भारत को आज भी लगता है कि एक बार इस संधि पर हस्ताक्षर होने के बाद रूस से सैन्य साज सामान लेना और सूचना का आदान-प्रदान करना दूभर होगा। भारत का रूस से एस- 400 एंटी मिसाइल सुरक्षा प्रणाली अर्जित करना इस मंत्री स्तरीय बैठक में विचारणीय मुद्दा है।

अमेरिका ने एस-400 एंटी मिसाइल सुरक्षा प्रणाली लेने पर पहले चीन और फिर नाटो सदस्य देश तुर्की को एक तरह से दंडित कर चुका है। ऐसी स्थिति में भारत के प्रति अमेरिकी रवैए का अनुमान लगाया जा सकता है। जानकार बताते हैं कि नेशनल डिफ़ेंस अथाराइज़ेशन एक्ट-2019 में छूट का प्रावधान है। अमेरिका भारत के प्रति इस छूट का इस्तेमाल करेगा, यह एक विचारणीय प्रश्न है।

हिंद प्रशांत महासागर में बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर सामरिक रणनीति के तहत अमेरिकी टेक्नोलाॅजी का हस्तांतरण एक अन्य विचारणीय मुद्दा है। भारत ने हिंद प्रशांत महासागर में निगाहबां बनने के लिए अमेरिका से बीस सशस्त्र ड्रोन की मांग की है। इसके साथ सी-17, सी-130 जे परिवहन विमान, स्टेट ऑफ आर्ट पी 8 आई मेरी टाइम टोही विमान, हारपून मिसाइल, अपाचे और चिनुक़ हैलिकाटर तथा 777 होईट्जर्स तोप और अन्य रक्षा सामान की मांग की है।

विदित हो कि दक्षिण पूर्व एशिया में भी अमेरिका को भारत के साथ की जरूरत है। लेकिन सवाल उठता है कि दक्षिण पूर्व एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर जापान और कोरिया के साथ भारत तीसरी आंख के रूप में अमेरिका के लिए काम करने में सक्षम होगा।

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