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लोहार्गल की 24 कोसी परिक्रमा बिना सूनी पड़ी है अरावली की वादियां

लोहार्गल की 24 कोसी परिक्रमा बिना सूनी पड़ी है अरावली की वादियां
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झुंझुनू । Action India News

कोरोना महामारी के चलते दुनिया भर में अफरा-तफरी का माहौल है। लोगों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। ऐसे में कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए देशभर के सभी बड़े धार्मिक स्थल धर्मावलंबियों के लिए बंद पड़े हैं। इसी श्रंखला में झुंझुनू जिले के लोहार्गल स्थित तीर्थ स्थल भी श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया है।

हर वर्ष श्रावण मास में लाखों लोग लोहार्गल के पवित्र सूर्य कुंड से जल भरकर कावड़ लेकर जाते थे। मगर कोरोना के चलते कावड़ ले जाने पर भी रोक लगी थी। इस कारण लोहार्गल में श्रावण का महीना भी सूना ही रहा था।

गोगा नवमी से लेकर अमावस्या तक क्षेत्र की अरावली की वादियों में स्थित पवित्र तीर्थ स्थलों पर लगने वाली 24 कोसीय (72 किलोमीटर) की परिक्रमा भी इस बार नहीं लग पाएगी। लोगों का मानना है कि हजारों सालों में यह पहला अवसर है। जब लोहार्गल की 24 कोसीय परिक्रमा नहीं लगेगी।

अरावली पर्वत मालाओं के मध्य स्थित तीर्थराज लोहार्गल में बाबा मालकेतु की 24 कोसीय परिक्रमा में हर साल अच्छी खांसी रंगत रहती है। खाकी अखाड़े के महंत दिनेश दास महाराज के सानिध्य में साधु संतों की टोली परिक्रमा का नेतृत्व करती रही है। इस बार यह परिक्रमा 13 अगस्त से 19 अगस्त तक चलने वाली थी। मगर कोरोना के कारण इसे जिला प्रशासन ने स्थगित कर दिया है।

जिला कलेक्टर उमरदीन खान का कहना है कि जिले में कोरोना संक्रमण के बढ़ते फैलाव को रोकने के लिए जिले के सभी धार्मिक स्थलों को बंद रखा जा रहा है। इसी कारण इस वर्ष लोहार्गल क्षेत्र के 24 कोसी परिक्रमा का भी आयोजन नहीं हो पाएगा।

लोहार्गल क्षेत्र में लगने वाली 24 कोसीय परिक्रमा का समापन अमावस्या के दिन होता है। उस दिन लोहार्गल के सूर्यकुंड के पवित्र जल में महास्नान होता है। जिसमें लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं। 24 कोसी परिक्रमा में भी हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस परिक्रमा में वैसे तो पूरे राजस्थान से श्रद्धालु शामिल होते हैं मगर शेखावाटी क्षेत्र के झुंझुनू व सीकर जिलों के लोगों की संख्या बहुत अधिक रहती है। लोहार्गल के पवित्र सूर्य कुंड को तीर्थराज के रूप में माना जाता है।

यहां लगने वाली 24 कोसीय परिक्रमा के दौरान लाखों श्रद्धालु माल केतु पर्वत के चारों ओर निकलने वाली नदियों की सात धाराओं लोहार्गल, किरोड़ी, शाकंभरी, नागकुंड, टपकेश्वर महादेव, शोभावती और खोरीकुंड के दर्शन कर स्नान करते हैं। बाबा मालकेतु की 24 कोसी परिक्रमा का पुराणों में भी विशिष्ट महत्व बताया गया है। लोहार्गल से शुरू हुई परिक्रमा के संपन्न होने पर एक बार फिर सूर्यकुंड में स्नान किया जाता है।

इस बार 24 कोसी परिक्रमा नहीं लगने से क्षेत्र के लाखों श्रद्धालुओं में मायूसी है। मगर कोरोना महामारी के कारण लोगों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर जो निर्णय किए जा रहे हैं वह सभी जनता के हित में ही है। सभी लागों को उनका पालना करना चाहिये।

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