Top
Action India

जागृति कला संगम के 40वां स्थापना मनाया गया लोककला महोत्सव के रूप

जागृति कला संगम के 40वां स्थापना मनाया गया लोककला महोत्सव के रूप
X

  • लोक कला महोत्सव में प्रसिद्ध कलाकारों ने दी प्रस्तुती

  • ‘ब्रज की तोय लाज मुकुट वारे ब्रज की तोय’ की प्रस्तुती ने बांधा समां

मथुरा । एएनएन (Action News Network)

बृज क्षेत्र की सुपरिचित सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था जागृति कला संगम ने सोमवार अपना 40वां स्थापना दिवस दो दिवसीय “लोक कला महोत्सव“ के रूप में मनाया। 40वें स्थापना दिवस का कार्यक्रम गोवर्धन नाथ मंदिर के प्रांगण में प्रस्तुत किया गया।

दो दिवसीय महोत्सव में लॉकडाउन के सभी नियमों का पालन किया गया। आमंत्रित लोगों को सेनेटाइज़ किया गया और सोशल डिस्टन्सिंग का भी ध्यान दिया गया। वहां कलाकारों ने भी समान दूरी और मास्क लगाए हुए थे।

कार्यक्रम का प्रारंम्भ भगवान गोवेर्धन नाथ के समक्ष सामजसेवी राजेंद्र केसोरैया (ऐडवोकेट), समाजसेवी सोहनलाल शर्मा, गीतकार डॉ. नटवर नागर, कथावाचक रसिकविहारी शर्मा ने सयुंक्त रूप से पुष्पहार पहनाकर और दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

सोमवार जागृति कला संगम के महामंत्री ने दर्शकों को बताया की जून 1980 को बृज की साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संस्था जागृति कला संगम की स्थापना की गयी थी। संस्था 1980 से अनवरत बृज की कलाओं की प्रस्तुतियां संपूर्ण देश ही नहीं वल्कि विदेशों में स्वांग मर्मज्ञ लोक कला रत्न पं लोकेन्द्र नाथ कौशिक के निर्देशन में प्रस्तुत की जाती रही।

ब्रज के अनेक ख्याति प्राप्त कलाकार जुड़े हैं इस संस्था से

जागृति कला संगम से बृज के अनेक ख्याति प्राप्त कलाकार जुड़े रहे। जिनमें स्वांग विद्या सम्राट मनोहर शर्म, स्वांग गायक पं गिर्राज प्रसाद (कांमां ), आनंद बिहारी तैलंग, कत्थक नृत्य के महान कलाकार के. एस. जैन, राम सिंह सिसोदिया, नेम सिंह सिसोदिया, गोपाल अग्रवाल, गोपाल प्रसाद व्यास, वंदना तैलंग, चाँद तारा ,किशन सिंह पचौरी, चौ. छज्जन सिंह, रासाचार्य पद्मश्री हरगोविंद महाराज, स्वामी राम शर्मा, रमेश रावत, माधुरी शर्मा, बनवारी लाल शर्मा जैसे बृज के जाने माने कलाकारों ने कला जगत में कीर्तिमान स्थापित किये।

ब्रज की तोय लाज मुकुट वारे ब्रज की तोय की प्रस्तुती ने बांधा समां

कलाकारों ने “बृज की तोय लाज मुकुट वारे बृज की तोय“ ने समां बांधा उसके बाद एक के बाद एक प्रस्तुतियां प्रभावी ढंग से प्रस्तुत होती रहीं, नरसिंह लीला, मयूर नृत्य, लोकगीत-“दुनिया देख के जरै के दुनिया देख के जरै मेरो नयो जुडो़ भईलो के दुनिया देख के जरे “ने दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।

दूसरे दिन कार्यक्रम का प्रारम्भ रंगाचार्य लोकेन्द्र नाथ कौशिक के निर्देशन में नाटक “हमें प्रजा ही रहने दो“ के पाठन से हुआ ,नाटक के पाठन में सभी नवीन प्रशिक्षण प्राप्त कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं का सटीक निर्वाह किया। नाटक के प्रारम्भ में दर्शकों की वंदना कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की गयी “दर्शक देव पधारे धन्य भाग हमारे “ नाटक पठान की प्रस्तुति प्रभावी और भावपूर्ण रही।

रंगकर्मियों ने कोरोना सजग पर डाला प्रकाश

नाटक के बीच बीच में कोरोना से सज़ग और जागरूक रहने के लिए चुटीले संवादों ने सभी को जागरूक किया। नाटक के बाद ऑनलाइन माध्यम से संस्था से जुड़े रंगकर्मियों ने प्रयागराज, आगरा, मुंबई, लखनऊ, दिल्ली, भोपाल आदि शहरों से रंगमंच की चेतना जगाने वाले रंगकर्मियों ने संस्था के कार्यकलापों पर परिचर्चा की।

जिसमें रंगकर्मी कपिल कुमार, भरतनाट्यकर्मी लोकेश भरद्वाज, रंगकर्मी नन्द किशोर पंत, संदीप आनंद, शिवेंद्र सिंह, संजय शुभांकर, अर्चना जोशी, अभिनेश्वर दयाल सक्सेना, रंगकर्मी अनुराग शर्मा, श्रीमती विरमा देवी, चंचला देवी, अभिनेता सौरभ कौशिक आदि थे। a

Next Story
Share it