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84 स्थानीय ग्रामीण मजदूर जगलों के रास्ते पैदल पहुंचे सुकमा

84 स्थानीय ग्रामीण मजदूर जगलों के रास्ते पैदल पहुंचे सुकमा
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  • लॉकडाउनके बाद से लगातार मजदूरों के आने का जारी है सिलसिला

सुकमा । एएनएन (Action News Network)

लॉकडाउन के बाद आवागमन के साधन बंद होने से बस्तर का मजदूर दूसरे राज्यों से अब मजबूरी में पैदल चलकर अपने गांव जगलों के रास्ते से वापस पहुंच रहे हैं। यह सिलसिला अनवरत जारी है। प्रशासन इसे लेकर ग्रामीणों के सहयोग से वापस लौटे उन मजदूरों का स्वास्थ्य जांच कर आइसालेशन में रख रही है। बावजूद इसके इतनी बड़ी तादाद में मजदूर अलग-अलग जगहों पर पहुंच रहे हैं कि उनकी जानकारी रखना भी प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। रव‍िवार को भी करीब 84 स्थानीय ग्रामीण मजदूर धुर नक्सल प्रभावित किस्टाराम, गोलापल्ली जैसे इलाकों से पैदल चलकर सुकमा पहुंचे हैं।

आन्ध्र प्रदेश व तेलंगाना की सीमा जिले के कोंटा से लगे होने से सुकमा जिले में सबसे ज्यादा ग्रामीण मजदूर पड़ोसी राज्यों से कोंटा पंहुच रहे हैं। जब से लॉकडाउन हुआ है, तब से लगातार मजदूरों के आने का सिलसिला जारी है। पलायन कर मजदूरी करने गए ग्रामीण अब मजबूरी में वापस लौट रहे हैं। क्योंकि वहां रोजगार नहीं मिलने से अपने पैसों से खाना पड़ रहा था, पैसे खत्म हो गए, इसलिए मजबूरी में पैदल आ गए। मजबूरी का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि रव‍िवार को करीब 84 ग्रामीण मजदूर किस्टाराम, गोलापल्ली जैसे इलाकों से पैदल चलकर पहुंचे हैं।

कोंटा एसडीएम हिमांचल साहू ने बताया कि दूसरे राज्यों से आ रहे मजदूरों की जांच कर उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है। रव‍िवार को भी करीब 84 ग्रामीण मजदूर सुकमा पंहुचे हैं, जिन्हें अइसोलेशन राहत शिविर में रखा गया है।

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