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‘दबाव बनाकर न्याय व्यवस्था को झुकाया नहीं जा सकता’, पंजाब में वकीलों की हड़ताल पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

चंडीगढ़.

पंजाब में विधिक सहायता बचाव वकील योजना (एलडीसी) के विरोध में चल रही वकीलों की हड़ताल को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि किसी योजना के दुरुपयोग या वास्तविक शिकायतों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन अनुचित मांगों को अनुचित तरीके से मनवाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि वकील बेशर्मी से अदालतों का काम रोक रहे हैं और न्यायिक व्यवस्था को दबाव में झुकाया नहीं जा सकता। मामला पंजाब के जिला न्यायालयों में चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वकीलों के काम से विरत रहने के कारण पंजाब भर में न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को न्याय पाने में परेशानी हो रही है।

27 दिनों से पंजाब में न्यायिक राहत की उपलब्धता लगभग ठप
अदालत ने कहा कि पिछले 27 दिनों से पंजाब में न्यायिक राहत की उपलब्धता लगभग ठप है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अदालत किसी भी अनुचित मांग के आगे नहीं झुकेगी। पीठ ने कहा कि यदि किसी को एलडीसी योजना के क्रियान्वयन में वास्तविक शिकायत है तो उसका समाधान किया जा सकता है, लेकिन अदालतों को बंद कराकर मांगें मनवाने का तरीका स्वीकार्य नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह सोचकर दबाव बनाया गया कि पूरी व्यवस्था अंततः झुक जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं होने दिया जाएगा और जो भी उचित कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि अदालतों का काम रोककर वकील समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं।

27 दिन से पंजाब के जिला न्यायालयों में न्यायिक कामकाज प्रभावित
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अरविंद सेठ ने अपनी याचिका में कहा है कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने एलडीसी योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर आरोपितों को संस्थागत तरीके से कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पूर्णकालिक विधिक सहायता बचाव वकीलों की व्यवस्था की गई है। पंजाब के कई बार संघों का आरोप है कि नई व्यवस्था से पहले लागू पैनल वकील प्रणाली के तहत काम करने वाले अधिवक्ताओं के अवसर प्रभावित हुए हैं। इसी विरोध में संघों ने प्रस्ताव पारित कर अनिश्चितकालीन काम बंद करने का फैसला लिया है।

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