
सोशल मीडिया ने प्रस्तुत किया अर्धसत्य का नया तथ्य: सीएम योगी
गोरखपु
गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सामान्य जीवन में व्यक्ति यह तय नहीं कर पाता है कि सत्य क्या है और असत्य क्या है। आज के समय में सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने सत्य और असत्य के बीच एक नया तथ्य प्रस्तुत कर दिया है, अर्धसत्य का, जो कभी सत्य नहीं होता। ऐसी स्थितियों में पूरी दुनिया की मानवता अवसाद की शिकार है, उसके सामने चुनौती है।
सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में बुधवार अपराह्न श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में व्यासपीठ का पूजन करने के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज विज्ञान भले ही कितना ही आगे बढ़ चुका हो, लेकिन जीवन में स्थायी शांति के लिए विश्व की मानवता केवल भारत भूमि को ही देखती है। भारत भूमि पर पावन कथाओं की परंपरा कठिन चुनौतियों में व्यक्ति का मार्ग सुगम बनाने के लिए मार्गदर्शन करती है। पवित्र कथाओं के वाचन और श्रवण की परंपरा, हजारों वर्षों की विरासत को समझने का भी अवसर होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में जब आचरण और विचार के बीच साम्यता प्रभावकारी होती है। व्यक्ति जब मनसा, वाचा, कर्मणा से एक दिशा में चलता है तो उसे सफलता प्राप्त होती है। मन, वचन और कर्म में एकरूपता न रहने पर भ्रम की स्थिति पैदा होती है। क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसे लेकर भ्रम पैदा होने पर ‘न घर का, न घाट का’ वाली स्थिति बन जाती है। श्रीमद्भागवत की कथा मनुष्य के इसी भ्रम को दूर करती है।
भक्ति, ज्ञान और निष्काम कर्म की प्रेरणा देती है श्रीमद्भागवत कथा
कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेंद्रदास जी महाराज का गोरक्षपीठ में स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण के वाचन और श्रवण की परंपरा 5000 वर्ष पुरानी है। भारत का श्रद्धालु इस कथा के माध्यम से ज्ञान, भक्ति व निष्काम कर्म की प्रेरणा प्राप्त करता है। जीवन के उद्देश्य व रहस्यों को समझने के लिए यह कथा अत्यंत महत्वपूर्ण है। 5000 वर्ष पहले शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को इस कथा का श्रवण कराया, तबसे एक लंबा कालखंड बीत गया। सनातन संस्कृति ने सम-विषम परिस्थितियों सहित तमाम चुनौतियों का सामना किया। उत्थान-पतन की कहानियों के बीच भी यह कथा हम सबकी स्मृतियों में बची रही। यह कथा जीवन की वास्तविकता का एहसास करते हुए अज्ञानता से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
मुख्यमंत्री के संबोधन के उपरांत व्यासपीठ पर विराजमान कथा व्यास, वृंदावन से पधारे मलूकपीठाधीश्वर श्रीमदजगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया। कथा प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से शाम 6 बजे तक सुनाई जाएगी। इसका विराम 29 सितंबर को होगा।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली श्रीमद्भागवत महापुराण की शोभायात्रा
श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ से पूर्व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मुख्य मंदिर से कथा स्थल (दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार) तक शंख ध्वनि की गूंज तथा वेदपाठी विद्यार्थियों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महापुराण की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के कथा स्थल पहुंचने पर अखंड ज्योति स्थापित की गई। पोथी प्रतिष्ठा और कथा व्यास के विराजमान होने के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अन्य यजमान ने व्यासपीठ और कथा व्यास की पूजा की। इस अवसर पर जगद्गुरु स्वामी सुग्रीव किलाधीश अयोध्या के विश्वेश प्रपन्नाचार्य, रामलला सदन अयोध्या के जगद्गुरु राघवाचार्य, स्वामी श्रीधराचार्य, महंत नारायण गिरी, अवधेश दास, रामलखन दास, राजू दास, रामानंद दास, बालक दास, जयबख्श दास सहित अनेक संत, यजमानगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




