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CG में बाढ़ से फसल बर्बाद, किसानों ने 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से मांगा मुआवजा

जगदलपुर.

अर्नब तूफान के बाद इंद्रावती नदी में आई बाढ़ ने बकावंड और जगदलपुर ब्लॉक के नदी किनारे बसे इलाकों में किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हुई, मिट्टी और कीचड़ भर गया और किसानों के सामने अब मुआवजे का सवाल खड़ा हो गया है।

इसी मांग को लेकर नदी किनारे के कई गांवों के किसान, सरपंच और जनपद सदस्य बस्तर सांसद महेश कश्यप से मिलने पहुंचे। किसानों का कहना है कि नुकसान इतना बड़ा है कि सामान्य राहत राशि से उनकी भरपाई संभव नहीं है।

किसानों की ये है मांग
किसानों की मांग है कि फसल नुकसान का आकलन सिर्फ सरकारी राहत दर से नहीं, बल्कि 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर के आधार पर किया जाए। किसानों का तर्क है कि खेती में जुताई, खाद-बीज और दवा समेत बड़ी रकम पहले ही खर्च हो चुकी थी और फसल घर पहुंचने से ठीक पहले बाढ़ ने पूरी मेहनत बर्बाद कर दी।

19 एकड़ फसल प्रभावित- किसान
नगरनार के किसान घनश्याम सेठिया के मुताबिक उनकी करीब 26 एकड़ जमीन में से 19 एकड़ फसल प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि प्रति हेक्टेयर 8 हजार रुपये जैसी राहत किसानों के वास्तविक नुकसान के मुकाबले बेहद कम है।

किसानों को झेलनी पड़ी दोहरी मार
वहीं जनपद सदस्य अर्जुन सेठिया ने कहा कि तूफान और खातीगुड़ा डैम से पानी छोड़े जाने के बाद किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। कई खेतों में मिट्टी और कीचड़ भर गया, पशुओं के लिए घास और पैरा तक नहीं बचा। किसानों ने साफ कहा है कि वे मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, कलेक्टर और प्रधानमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाएंगे। उनका कहना है कि उन्हें ऐसा मुआवजा चाहिए जिससे कर्ज के साथ खेती में हुए खर्च की भरपाई हो सके और किसान दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

सांसद ने कही मुख्यमंत्री से चर्चा करने की बात
वहीं इस मामले पर बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा अर्नब तूफान के बाद तीन दिन लगातार बारिश और डैम से पानी छोड़े जाने के कारण नदी किनारे हजारों एकड़ फसल बर्बाद हुई है। किसानों की मांग है कि उन्हें 21 क्विंटल धान खरीदी के हिसाब से मुआवजा दिया जाए, ताकि वे कर्ज चुका सकें और परिवार का भरण-पोषण कर सकें। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री से चर्चा करने के साथ ही प्रधानमंत्री राहत कोष से भी सहायता की मांग करेंगे।

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