टेक एंड ऑटो

भारत में टेक जॉब्स 1.23 लाख के पार, लेकिन फ्रेशर्स के लिए घटी नौकरियां; अनुभवी लोगों की बढ़ी मांग

भारत के टेक्नोलॉजी जॉब मार्केट से एक बहुप्रतीक्षित और राहत भरी खबर आई है. देश में टेक नौकरियों की संख्या पिछले 18 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अक्टूबर में एक्टिव जॉब्स का आंकड़ा 1.23 लाख के पार हो गया है. लेकिन, अगर आप कॉलेज पासआउट हैं और यह सोच रहे हैं कि बाजार खुलने का सीधा फायदा आपको मिलेगा, तो ठहरिए—आंकड़ों की इस चमक के पीछे एक बड़ा कैच (पेच) छुपा है.

स्टाफिंग फर्म 'Xpheno' की ताजा 'एक्टिव टेक जॉब्स आउटलुक' रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में नौकरियों की मांग सितंबर के मुकाबले 5% और पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 17% बढ़ी है. हालांकि, रिकवरी की यह बयार सबके लिए एक जैसी नहीं है, इस बाजार पर पूरी तरह से अनुभवी पेशेवरों का कब्जा दिख रहा है.

1.23 लाख नौकरियां… आखिर किसे मिल रहा है मौका?
आंकड़ों का हिसाब-किताब देखें तो मिड-सीनियर (अनुभवी) रोल्स की मांग सबसे ज्यादा है. अकेले इस सेगमेंट में 68,000 वेकेंसी हैं, जो कुल ओपनिंग्स का 55% हिस्सा हैं. इसमें सालाना आधार पर 19% का उछाल दर्ज किया गया है.

दूसरी तरफ, फ्रेशर्स या एंट्री-लेवल नौकरियों की संख्या महज 15,000 पर सिमट कर रह गई है. हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल से 15% ज्यादा है, लेकिन सितंबर के मुकाबले इसमें 6% की गिरावट दर्ज की गई है. साफ संदेश है कि बाजार तो बड़ा हो रहा है, लेकिन मलाई अनुभवी हाथों के हिस्से ही आ रही है.

हायरिंग लेवल का पूरा गणित
मिड-सीनियर: 68,000 (कुल का 55%, YoY +19%)
एंट्री-लेवल: 15,000 (YoY +15%, लेकिन MoM -6%)
मिड-जूनियर: 7,000 (MoM +40%, YoY +17%)
सीनियर रोल्स: 2,000 (मांग का छोटा हिस्सा)
अन्य/अपरिभाषित पद: 31,000

कंपनियों को कैसी स्किल्स की तलाश है?
इस रिकवरी को सबसे ज्यादा सहारा आईटी सर्विसेज से मिल रहा है, जहां 66,000 एक्टिव नौकरियां हैं जो पिछले साल अक्टूबर से 57% ज्यादा हैं.

कंपनियां अब सिर्फ डिग्री देखकर नौकरियां नहीं बांट रहीं. Xpheno के मुताबिक, एआई इंजीनियरिंग (AI Engineering), डेटा एनालिस्ट और टेक्निकल लीडरशिप जैसे रोल्स की जबरदस्त डिमांड है. टॉप 6 आईटी कंपनियों के डेटा से पता चलता है कि इन खास रोल्स में टैलेंट पूल पिछले दो तिमाहियों में 14% से 22% तक बढ़ा है.

कोर टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग रोल्स 61,000 नौकरियों के साथ सबसे आगे हैं. इसके बाद टेक बिजनेस डेवलपमेंट व सेल्स (14,000), टेक कंसल्टिंग (5,000) और आईटी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट (3,000) का नंबर आता है.

वर्क-फ्रॉम-होम का जमाना खत्म, ऑफिस वापसी का दौर
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में 18,000 वेकेंसी हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 64% ज्यादा हैं. लेकिन सबसे बड़ा बदलाव काम करने के तरीके में आया है.

वर्क-फ्रॉम-ऑफिस (WFO): 1 लाख नौकरियां (कुल मांग का 81%) पूरी तरह ऑफिस से काम करने वाली हैं.
रिमोट और हाइब्रिड: वर्क-फ्रॉम-होम (रिमोट) नौकरियों में 23% और हाइब्रिड रोल्स में 19% की भारी गिरावट आई है.

बेंगलुरु का दबदबा कायम, लेकिन टियर-2 और 3 शहरों ने चौकाया
टेक जॉब्स के मामले में 31,000 नौकरियों के साथ बेंगलुरु देश का सबसे बड़ा हब बना हुआ है. इसके बाद हैदराबाद (14,000) और दिल्ली-एनसीआर (9,000) का नंबर आता है. लेकिन असली चौंकाने वाला आंकड़ा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आया है. छोटे शहरों में एक्टिव टेक नौकरियों की संख्या बढ़कर 40,000 पहुंच गई है, जिसमें सालाना आधार पर 67% की रिकॉर्ड तेजी देखी गई है.

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