
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे पर संकट, मंजूरी में देरी से अटक सकता है जमीन अधिग्रहण
पटना
बिहार के आठ जिलों से होकर गुजरने वाली गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के निर्माण पर संकट मंडराने लगा है। अगर केन्द्रीय कैबिनेट की जल्द स्वीकृति नहीं मिलती है तो भूमि अधिग्रहण कार्य प्रभावित हो सकता है। इसको लेकर पथ निर्माण विभाग ने केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से आग्रह किया है कि जन-निजी भागीदीर के तहत इसके निर्माण की जल्द मंजूरी दें। साथ ही विभाग ने इस परियोजना को चार से बढ़ाकर छह लेन के रूप में विसकित करने का अनुरोध किया है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस परियोजना को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति की मंजूरी के लिए भेजा है। इसकी मंजूरी मिलने के बाद ही इस सड़क के निर्माण की दिशा में कदम आगे बढ़ेंगे। उधर, किशनगंज को छोड़कर अन्य जिलों के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है।
इसमें बताया गया है कि कौन-कौन सी जमीन किस जिले में चिह्नित की गई है। विभाग ने कहा है कि इस साल के अंत तक अगर भूमि अधिग्रहण का अगला चरण शुरू नहीं हुआ तो नये सिरे से इसकी अधिसूचना जारी करनी पड़ेगी। इसकी वजह यह है कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना के सालभर के भीतर जमीन किसानों से लेने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके पूर्व किसानों को उनकी जमीन परियोजना के दायरे में आने तथा अधिग्रहण के संबंध में सूचना दी जाती है। यदि दूसरे चरण के अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं हुई तो इस एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण के कार्य में विलंब होने की आशंका है। विभाग ने कहा है कि गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को चार लेन की जगह छह लेन बनाने का आग्रह पूर्व में भी किया गया था, जिस पर अभी तक सहमति नहीं मिली है।
बिहार के इन जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 568 किलोमीटर है। बिहार में इसकी लंबाई करीब 417 किलोमीटर है। यह राज्य के आठ जिलों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से गुजरेगा। इस एक्सप्रेस-वे की शुरुआत गोरखपुर से होगी और देवरिया होते हुए बिहार में प्रवेश करेगी। इस एक्सप्रेस-वे से चार राज्यों में आवागमन बेहतर हो सकेगा। इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम शामिल हैं।। सीतामढ़ी माता सीता की जन्मभूमि है और वहां अयोध्या की तर्ज पर मां जानकी मंदिर का निर्माण हो रहा है। इस तरह से उत्तर बिहार में धार्मिक पर्यटन को भी इस एक्सप्रेस-वे से बढ़ावा मिलेगा। बिहार से सिलीगुड़ी और फिर इसके बाद असम तक एक्सप्रेस-वे से जाना आसान हो जाएगा। इस तरह इससे कामाख्या मंदिर तक की सुगम संपर्कता मिले।




