
सिंधिया राजपरिवार संपत्ति विवाद में आज प्रतिमा राणा के दर्ज होंगे बयान
ग्वालियर
सिंधिया राजपरिवार की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में बुधवार को सुनवाई होगी। पिछले गुरूवार को यह सुनवाई नियत थी लेकिन जिला कोर्ट में तिथि आगे बढ़ गई। फिलहाल यह पूरा मामला समझौते पर हस्ताक्षर की वैधता पर केंद्रित है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सुनवाई चल रही है।
इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा राणा के बयान दर्ज किए जाने हैं। प्रतिमा ने आरोप लगाया है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए थे। अब उन्हें अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य भी पेश करने होंगे।
प्रतिमा राणा ने अदालत में आवेदन देकर समझौता प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराए।
पक्ष रखने का अवसर दिया
अदालत ने उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए पक्ष रखने का अवसर दिया है। इससे पहले 14 अक्टूबर को हुई सुनवाई में भी प्रतिमा के साक्ष्य दर्ज कराने के मुद्दे पर विचार किया गया था। प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति का जवाब प्रतिमा राणा की तीनों मौसियों (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे) ने न्यायालय में दिया है। उनका कहना है कि सहमति से हस्ताक्षर हुए, हस्ताक्षर के बाद सभी वहां रुके फिर फैमिली डिनर हुआ और आखिर में फोटोग्राफ्स भी लिए गए।
आपसी सहमति से तैयार हुए जिस समझौता प्रस्ताव (राजीनामे) पर कोर्ट के फैसले की उम्मीद लगाई जा रही थी, अब वह पूरी तरह प्रतिमा राणा की आपत्ति पर टिक गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में आज (बुधवार, 04 नवंबर) इस हाई-प्रोफाइल केस की अहम सुनवाई है। सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ (दिवंगत पद्मावती राजे) की बेटी प्रतिमा राणा के बयान दर्ज होंगे।
प्रतिमा राणा ने आरोप लगाया है कि उनसे धोखाधड़ी करके समझौते पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। कोर्ट ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का मौका दिया है।
डिनर हुआ, फोटो खिंचे: मौसियों ने खारिज किए धोखाधड़ी के आरोप
प्रतिमा देवी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत अपनी तीनों मौसियों जिनमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे पर धोखे से दस्तखत कराने का सीधा आरोप लगाया है।
दूसरी ओर, तीनों मौसियों (वसुंधरा, यशोधरा व उषा राजे) ने अदालत में जवाब दाखिल कर इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि सभी की सहमति से हस्ताक्षर हुए थे।
दस्तखत के बाद सभी लोग साथ रुके, फैमिली डिनर हुआ और तस्वीरें भी खिंचवाई गईं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष ने भी कोर्ट को बताया कि दस्तखत पूरी सहमति से हुए हैं और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है।
पहले घोषित हुई थीं 'एक्स पार्टी', अब पूरे समझौते की चाबी प्रतिमा के पास
गौरतलब है कि वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हक मांगने के लिए सिविल सूट दायर किया था।
पहले केस का पुराना मोड़
इस मूल केस में बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटियों (कनिका देवी और प्रतिमा देवी) को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन कोर्ट में हाजिर न होने पर उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया गया था।
अब वर्तमान स्थिति
अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में अर्जी देकर दोबारा प्रक्रिया में शामिल होने की गुहार लगाई है। पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, ऐसे में उनकी बेटियों को नजरअंदाज कर किया गया राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।
78 साल पुराना 'द कोवेनेंट' तय करेगा फैसला
ग्वालियर की अदालती जंग में अब 78 साल पुराना ऐतिहासिक विलय पत्र यानी ‘द कोवेनेंट’ सबसे बड़ा और निर्णायक दस्तावेज बनकर उभरा है। दिल्ली के नोटरी से सर्टिफाइड इस दस्तावेज की ट्रू कॉपी कोर्ट में पेश की जा चुकी है।
इसमें मध्य भारत की रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और पूर्व राजाओं को मिलने वाले टैक्स-फ्री ‘प्रिवी पर्स’ (वार्षिक भत्ते) का पाई-पाई का ब्योरा दर्ज है। अब देखना होगा कि आज प्रतिमा राणा के बयानों और सबूतों के बाद इस ₹41,000 करोड़ के साम्राज्य का विवाद क्या मोड़ लेता है।




