
समय बदला तो साइकिल के स्थान पर मोटर साइकिल आ गया…
टीम एक्शन इंडिया
पानीपत/कमाल हुसैन
बचपन में होता था प्रत्येक बच्चे का एक सपना, हे भगवान कर कृपा एक साइकिल दो जो हो मेरा अपना।
दो शीशे और दो घंटियां साइकिल के हैंडल के दोनों ओर बढ़ाती थी साइकिल की शोभा।
साइकिल के आगे पीछे होता था काला धागा कोई नजर न लगा दे अभागा।
बचपन में होता था प्रत्येक बच्चे का एक सपना ………
समय बदला तो साइकिल के स्थान पर मोटर साइकिल आ गया, साइकिल धुल चाट रहा खड़े-खड़े उसको जर खा गया।
जिस साइकिल को रगड़ कर चमकाता था प्रतिदिन, आज कबाड़ी की दुकान पर दो कौड़ी के भाव आ गया।
बचपन में होता था प्रत्येक बच्चे का एक सपना ………
सड़कों पर साइकिल ऐसे लुप्त हुई जैसे गधे के सिर से सींग गायब हो जाता है।
कहा जाता है समय बड़ा बलवान है, वो लौट कर अवश्य आता है।
न चाहते हुए भी वो अपना रंग दिखाता है।
जैसे बाल्यावस्था से युवा और युवा वृद्धावस्था को पाता है।
बचपन में होता था प्रत्येक बच्चे का एक सपना ………
मोटर वाहनों का प्रसार जब यौवन में आया, मनुष्य हुआ विलासी रोगों ने घेरा पाया।
चिकित्सक ने दिया लिखकर परामर्श, 30 मिनट प्रतिदिन साइकिल चलाओ जीवन होगा आदर्श।
स्वास्थ्य की कुंजी है साइकिल चलाना, अनेक रोगों से है यदि स्वयं को बचाना।
शर्करा की समस्या न आएगी पास, यदि साइकिल के पैड़ल लगा दिए खास।
बचपन में होता था प्रत्येक बच्चे का एक सपना ………
डॉ. अशोक कुमार वर्मा, हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो में नशे के विरुद्ध अभियान के जागरूकता कार्यक्रम एवं पुनर्वास प्रभारी के रूप में नियुक्त हैं। वर्षों से सैकड़ों साइकिल यात्रा कर लोगों को सड़क सुरक्षा, नशे से दूर और पर्यावरण संरक्षण का सन्देश दे रहे हैं।



