अन्य राज्यउत्तर प्रदेश

गति से प्रगति का नया उत्तर प्रदेश: 50 मिनट में दिल्ली से मेरठ

मेरठ/लखनऊ

पश्चिम उत्तर प्रदेश की धरती पर विकास की एक नई इबारत लिखी गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में हाई-स्पीड ‘नमो भारत’ रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो को हरी झंडी दिखाकर 82 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मेरठ संपूर्ण कॉरिडोर राष्ट्र को समर्पित किया। यह केवल एक परिवहन परियोजना का शुभारंभ नहीं, बल्कि डबल इंजन सरकार के उस संकल्प का साकार रूप है, जिसमें केंद्र और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मिलकर प्रदेश को तेज़, सुरक्षित और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेट्रो और औद्योगिक कॉरिडोर के क्षेत्र में जो रफ्तार पकड़ी है, मेरठ मेट्रो और नमो भारत उसका नवीनतम उदाहरण हैं।

दूरी वही, लेकिन अब समय आधा

दिल्ली से मेरठ की भौगोलिक दूरी लगभग 80-82 किमी है, लेकिन अब यह सफर महज 50 मिनट में तय होगा। कभी जाम और भीड़भाड़ से जूझने वाला यह मार्ग अब हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का प्रतीक बन गया है। जहां पहले दिल्ली से मेरठ आने-जाने में 3 से साढ़े तीन घंटे तक लग जाते थे, वहीं अब आधुनिक रैपिड रेल प्रणाली ने समय को आधा नहीं, बल्कि लगभग एक तिहाई कर दिया है। 180 किमी प्रति घंटा तक की रफ्तार से चलने वाली नमो भारत ट्रेन भारत के शहरी परिवहन इतिहास में नई ऊंचाई स्थापित कर रही है। दिल्ली और मेरठ अब महज दो भौगोलिक इकाइयां नहीं रहे, बल्कि ‘नमो भारत’ की रफ्तार ने उन्हें एक सशक्त, समेकित और उभरते विकास कॉरिडोर में बदल दिया है, जहां रोजगार, निवेश, शिक्षा और आवागमन के नए अवसर निरंतर विस्तार पा रहे हैं।

एक ट्रैक, दो सुविधाएं: मेरठ मॉडल बना उदाहरण

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका एकीकृत मॉडल है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एनसीआरटीसी) द्वारा विकसित इस कॉरिडोर पर हाई-स्पीड ‘नमो भारत’ और शहर के भीतर संचालित मेरठ मेट्रो, दोनों सेवाएं एक ही इन्फ्रास्ट्रक्चर ढांचे पर चल रही हैं। यह मॉडल लागत में बचत, संसाधनों के बेहतर उपयोग और तेज निर्माण का उदाहरण है। मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक शहर के प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ती मेरठ मेट्रो अब स्थानीय आवागमन को जाम मुक्त और सुगम बनाएगी।

योगी सरकार का इन्फ्रास्ट्रक्चर विजन

उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर साबित किया है कि जब गति मिलती है तो प्रगति अपने आप रास्ता बना लेती है। 2017 में योगी सरकार आने के बाद उत्तर प्रदेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकास का आधार बनाया गया। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, नए एयरपोर्ट और मेट्रो परियोजनाओं की श्रृंखला ने प्रदेश को राष्ट्रीय मानचित्र पर अग्रणी बना दिया। मेरठ, जो कभी अपराध और अव्यवस्था की खबरों से जुड़ता था, आज हाई-स्पीड रेल, खेल विश्वविद्यालय, औद्योगिक निवेश और स्मार्ट शहरी परिवहन के कारण चर्चा में है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में बदली यह तस्वीर योगी सरकार की सुदृढ़ कानून व्यवस्था और विकासोन्मुखी नीतियों का परिणाम मानी जा रही है। यह परियोजना “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ बिजनेस” का वास्तविक उदाहरण है। कम समय में सुरक्षित यात्रा, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं, इन सबका समन्वय प्रदेश को निवेश और विकास के लिए और अधिक आकर्षक बनाता है।

नमो भारत रेल में 80% स्टाफ महिलाओं का

नमो भारत रेल में लगभग 80% स्टाफ महिलाओं का होना अपने आप में ऐतिहासिक है। यह पहल नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संदेश देती है। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने वाली नीतियों का यह जमीनी उदाहरण है, जहां महिलाएं देश की सबसे तेज रैपिड ट्रेन की कमान संभालेंगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हाई-स्पीड ट्रेन के परिचालन में लोको पायलट (चालक) से लेकर स्टेशन मैनेजमेंट तक में महिलाओं की भागीदारी 80% से अधिक है, जो इसे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाला पहला रैपिड रेल प्रोजेक्ट बनाता है।

पर्यावरण व स्वच्छता की दिशा में बड़ा कदम

रैपिड रेल और मेट्रो से सड़कों पर लगभग एक लाख निजी वाहनों की संख्या घटने का अनुमान है, जिससे करीब ढाई लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है। तेज व सुगम परिवहन का विकल्प मौजूद होगा तो निजी वाहनों की निर्भरता घटेगी, ट्रैफिक जाम कम होंगे और इससे प्रदूषण में भी गिरावट आएगी। ग्रीन एनर्जी और क्लीन एयर के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में यह परियोजना एक अहम मील का पत्थर है।

दिल्ली-एनसीआर का विकल्प, युवाओं को मिलेंगे पंख

दिल्ली-एनसीआर में महंगी जमीन व किराये को देखते मेरठ अब एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभरेगा। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण लोग मेरठ में रहकर दिल्ली में नौकरी या कारोबार कर सकेंगे। स्थानीय निर्यातकों के लिए भी दिल्ली एयरपोर्ट तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान होगा। दिल्ली और मेरठ के बीच हजारों छात्र प्रतिदिन शिक्षा के लिए यात्रा करते हैं। मेडिकल, तकनीकी और अन्य संस्थानों के छात्रों को अब तेज और सुरक्षित सफर मिलेगा। प्रधानमंत्री ने भी उद्घाटन के दौरान छात्रों से संवाद कर यह संदेश दिया कि आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर ही विकसित भारत 2047 की नींव है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास की नई धारा

मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत जैसे जिलों को भी इस परियोजना का अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से पर्यटन, कृषि व्यापार और उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी। अब “दिल्ली दूर है” या “मेरठ दूर है” जैसी कहावतें अप्रासंगिक हो गई हैं। 50 मिनट का यह सफर अवसरों की दूरी भी घटा रहा है।

डबल इंजन की ताकत, विकसित भारत का मार्ग

मेरठ मेट्रो और नमो भारत रैपिड रेल केवल परिवहन परियोजनाएं नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बदलते आत्मविश्वास का प्रतीक हैं। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब इन्फ्रास्ट्रक्चर, निवेश और रोजगार के नए मानक स्थापित कर रहा है। यह परियोजना इस बात का संकेत है कि जब नीति स्पष्ट हो, नीयत मजबूत हो और नेतृत्व प्रतिबद्ध हो, तो विकास केवल वादा नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाली सच्चाई बन जाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button