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अधिवक्ताओं ने कामकाज ठप्प कर किया प्रदर्शन, 15 अप्रैल को घेरेंगे विधानसभा

अधिवक्ताओं ने कामकाज ठप्प कर किया प्रदर्शन, 15 अप्रैल को घेरेंगे विधानसभा
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मेरठ। एएनएन (Action News Network)

प्रदेश सरकार पर वकीलों की अनदेखी और उच्च न्यायालय पर एडवोकेट एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए सोमवार को यूपी के अधिवक्ता एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। यूपी बार काउंसिल के आवाह्न पर मेरठ कचहरी में कामकाज ठप करते हुए सैकड़ों वकीलों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।

वकीलों ने अपनी मांगे पूरी ना होने पर 15 अप्रैल को विधानसभा के घेराव का ऐलान किया है। मेरठ बार एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी नरेश दत्त शर्मा के नेतृत्व में सोमवार को मेरठ कचहरी के वकीलों ने कचहरी में एक दिवसीय हड़ताल रखी। इस दौरान जहां अदालतों में सन्नाटा पसरा रहा, वहीं वकीलों के चैंबर भी खाली नजर आए। सरकार और उच्च न्यायालय पर वकीलों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दर्जनों वकीलों ने लाल रिबन बांधकर जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया।

मेरठ बार एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी नरेश दत्त शर्मा ने बताया कि वर्ष 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने वकीलों की पहचान के लिए सीओपी कार्ड की व्यवस्था की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले उच्च न्यायालय ने मनमानी करते हुए सिर्फ जिला जज द्वारा जारी किए गए पहचान पत्र को ही वकीलों के लिए मान्य बताया है।

इस बात पर यूपी बार काउंसिल ने आपत्ति जताते हुए पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं से आज एक दिवसीय हड़ताल का आवाह्न किया है। वहीं, हड़ताल के दौरान मौजूद समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह एडवोकेट ने बताया कि पिछली सरकार ने वर्ष 2017 में वकीलों के उत्थान के लिए 40 करोड़ की सहायता राशी की घोषणा की थी। इसी के साथ वकीलों के मृतक आश्रितों को 55 लाख के मुआवजे का भी ऐलान किया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने ना तो अब तक 40 करोड़ की राशि आवंटित की और ना ही किसी वकील के मृतक आश्रित को मुआवजा मिला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उच्च न्यायालय या प्रदेश सरकार ने वकीलों की सुनवाई नहीं की तो प्रदेश भर के वकील आने वाली 15 अप्रैल को लखनऊ में विधानसभा का घेराव करेंगे। उधर, वकीलों की हड़ताल के चलते कचहरी में अपने मामलों की तारीख पर आए लोग अदालतों के चक्कर काटते नजर आए।

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