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माफिया विरोधी अभियान के बावजूद अपनी ही जमीन को नहीं बचा पा रहा प्रशासन

माफिया विरोधी अभियान के बावजूद अपनी ही जमीन को नहीं बचा पा रहा प्रशासन
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छतरपुर। एएनएन (Action News Network)

मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर मध्यप्रदेश के कई जिलों में भले ही माफिया विरोधी अभियान के कारण सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों में खौफ पनप रहा हो, लेकिन छतरपुर में माफिया जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण खूब मजे में है।

दिलचस्प बात है कि छतरपुर जिले में प्रशासन अपने ही एक विभाग की जमीन पर पांच महीने से चल रहे अवैध निर्माण को रोकने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। सिविल न्यायाधीश की अदालत ने अतिक्रमणकारियों को हटाने के निर्देश भी दे दिए इसके बाद भी अतिक्रमणकारी जमे हुए हैं। अपनी तरह का यह रोचक मामला मध्यप्रदेश सरकार को संज्ञान में लेना चाहिए।
यह है मामला
छतरपुर जिला मुख्यालय पर सटई रोड स्थित कृषि उपज मंडी की सरकारी जमीन पर यहीं रहने वाले जीतेन्द्र जैन तनय ज्ञानचंद्र जैन एवं उनके भाई प्रत्येन्द्र तनय ज्ञान चंद्र जैन के द्वारा कब्जा कर दुकानें बनाई जा रही हैं। पांच महीने से मंडी सचिव दर्जनों शिकायती आवेदन देकर जिला प्रशासन को आगाह कर चुका है कि अतिक्रमणकारियों ने उक्त सरकारी जमीन को अपनी जमीन बताकर इस पर निर्माण कार्य चालू कर रखा है लेकिन प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगी।

मंडी सचिव ने हक 3 जनवरी को फिर से एक बार माफिया विरोधी अभियान के मुखिया अपर कलेक्टर प्रेम सिंह चौहान को एक शिकायती आवेदन सौंपा था। इस आवेदन में बताया गया कि उक्त दोनों अतिक्रमणकारी वर्ष 2014 में इस मामले को दीवानी अदालत में ले गए थे। जहां से उनकी अपील 29.01.2014 को प्रस्तुत होकर 7.03.2019 को निरस्त हो चुकी है।

अपील खारिज होने के बाद आरोपियों ने 30.07.2019 से जबरदस्ती निर्माण कार्य शुरु करा दिया। जब इस निर्माण कार्य को मंडी के कर्मचारियों ने रोका तो उन्हें गुंडों के द्वारा गालियां देकर भगा दिया गया। यह निर्माण कार्य 02.08.2019 को फिर शुरु हुआ। इस बार मंडी के कर्मचारियों ने सिविल लाइन पुलिस को इसकी सूचना दी लेकिन पुलिस ने भी कोई कार्यवाही नहीं की। मंडी गेट क्रमांक 1 के बगल में अतिक्रमणकारियों ने जबरदस्ती कई दुकानों का निर्माण कर लिया है और देखते ही देखते यह निर्माण पूर्ण हो चुका है।

मंडी सचिव ने दिए कई आवेदन, फिर भी सुनवाई नहीं

मंडी सचिव ने हाल ही में एडीएम को दी गई शिकायत में बताया कि पहले भी अवैध निर्माण कार्य के दौरान कई आवेदन प्रशासन और पुलिस को दे चुका है। उन्होंने 30.07.2019, 01.08.2019 को भी आवेदन देकर अवैध निर्माण कार्य पर रोक लगाने के लिए भी प्रशासन को सूचित किया था लेकिन किसी ने इस बात पर गौर नहीं किया।

इस मामले में जब कलेक्टर मोहित बुंदस से अथवा एडीएम प्रेम सिंह चौहान से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।
इस मामले में कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें की जा चुकी हैं। अतिक्रमणकारियों ने बिना किसी ठोस दस्तावेज के यहां तीन दुकानें बना ली हैं। इस बार फिर से शिकायत की है।

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