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एक दर्जन प्रवासियों ने चार दिन में साइकिल से तय किया बीकानेर से औरैया तक का आधा सफर, सुल्तानपुर मंजिल के लिए हुए रवाना

एक दर्जन प्रवासियों ने चार दिन में साइकिल से तय किया बीकानेर से औरैया तक का आधा सफर, सुल्तानपुर मंजिल के लिए हुए रवाना
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  • संकट के दौर में परेशानी होना लाजमी है लेकिन जब परेशानी कठिन और जटिल हो तो संकट गहरा जाता है

औरैया । एएनएन (Action News Network)

देश में महामारी से आये संकट के कारण घर वापसी के लिए प्रवासी मजदूर उन साधनों का प्रयोग कर रहे है जिन्हें इस आधुनिक युग में लोगों ने छोड़ दिया था। आखिर मजबूरी ही कुछ ऐसी है कि लॉक डाउन के कारण प्रवासी मजदूरों के काम पर संकट आ गया है, जिससे देश के कोने-कोने में काम के लिए गए मजदूरों को घर वापसी करना पड़ रहा है। हालांकि मजदूरों के लिए घर वापसी एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि ज्यादातर मजदूरों का घर एक हजार किमी से कम नहीं है। देश के कोने-कोने में फंसे मजदूरों ने घर जाने के लिए साइकिल का सहारा लिया और टोली बनाकर निकल पड़े एक लंबे सफर पर निकल पड़े हैं।

शुक्रवार की सुबह औरैया शहर के गल्ला मंडी से गुजर रहे एक दर्जन प्रवासी मजदूर 900 किमी का मुश्किल भरा सफर साइकिल से करने को मजबूर है। क्योंकि इस महामारी से हुये लॉक डाउन में घर ही उनका ठिकाना है।फिलहाल उनकी हिम्मत उनको घर जाने के लिए विषम परिस्थितियों को टालती नजर आ रही है। लेकिन राजस्थान के बीकानेर से यूपी के सुल्तानपुर तक का सफर उन्होंने इस कठिन परिस्थिति में तय करने की हिम्मत जुटाई और निकल पड़े। शुक्रवार को 4 दिन का सफर तय कर वह औरैया पहुंचे।

यहां पर थक कर चूर हो चुके प्रवासियों को रोककर समाजसेवियों द्वारा भोजन पानी कराया गया। इस दौरान टोली में शामिल सुल्तानपुर के अखिलेश ने बताया कि हम सभी बीकानेर में काम करते, लेकिन पूर्ण बंदी के चलते वही फस गए थे। जिसके बाद तय किया कि अब साइकिल से ही घर तक की मंजिल तय करनी है। आधा सफर तय कर लिया है अभी आधा बाकी है। यहां भोजन और पानी करने के बाद यह सभी फिर से अपने सफर को आगे बढ़ाते हुए सुल्तानपुर के लिए साइकिल से निकल गए।

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