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आर्युवेद एवं यूनानी चिकित्सा को केन्द्र ने दी संजीवनी, पांचवीं पीढ़ी भी दे रही हकीम की सेवा

आर्युवेद एवं यूनानी चिकित्सा को केन्द्र ने दी संजीवनी, पांचवीं पीढ़ी भी दे रही हकीम की सेवा
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प्रयागराज । एएनएन (Action News Network)

कोरोनावायरस को लेकर केन्द्र सरकार ने आर्युवेद एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मनुष्य के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में प्राचीन चिकित्सा पद्धति सबसे कारगर उपाय है। दोनों पद्धति में उपयोगी अस्सी फीसदी जड़ी बूटियां अपने देश में मिलती हैं। इन औषधियों के उत्पादन से देश को मजबूती मिलेगा।

पांचवीं पीढ़ी के हकीम रेशादुल इस्लाम ने हिन्दुस्थान समाचार प्रतिनिधि से कहा कि इसके पूर्व की सरकारों भारतीय चिकित्सा पद्धति पर कोई ध्यान नहीं दिया। जिसका दुष्परिणाम यह रहा कि एक तरह विविध प्रकार के रोग बढ़े तो दूसरी तरफ मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता कम हुई। एलोपैथ को बढ़ावा देने का नतीजा यह रहा कि वैद्य एवं हकीम भी मजबुरी में अपने परम्परागत सेवा व पेशे से दूर हो गए।

पांच पीढ़ी से हकीमी से नाता

बताया कि जौनपुर जिले के हम बसीन्दे हैं। हकीम सुभान और उनके दो बेटे हकीम अब्दुल वाहिद और हकीम कमरुद्दीन, इनके बाद हकीम नसीम एवं हकीम जियाउद्दीन इस तरह हम पांचवीं पीढ़ी में है। जौनपुर से लगभग 120 वर्ष पूर्व इलाहाबाद के मऊआइमा में बसे। जहां कताई मिल के मजदूरों को दवा देना शुरू किया।

मेरे पिता जी लखनऊ तिब्या युनानी कालेज के प्राचार्य थे। हकीम जमील उद्दीन यूनानी मेडिकल इलाहाबाद में पढ़ाते हैं। एक भाई डॉ.इमादुल इस्मेलाम अमेरिका में हैं। मैंने सहारनपुर दिब्या कालेज से शिक्षा ग्रहण करने के बाद से 1994 से हकीम का काम शुरू किया। दवांए स्वयं बनाते हैं और कुछ दवाओं को बाहर से मंगाते हैं।

आयुष मंत्रालय की कोविड प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र

बताया कि केन्द्र सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित कोविड प्रशिक्षण में शामिल के लिए गया था। जिसके बाद से कोरोनावायरस की दवा तैयार करने एवं मनुष्य के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाईयां भी तैयार कर रहे हैं।

'सनाई मिक्की' वायरस को दूर करने में है सहायक

हकीम रेशादुल इस्लाम ने बताया कि कोई भी संक्रमण सबसे पहले छोटी आंत से शुरू होती है। यदि इस दवा का उपयोग ठीक ढंग से करें तो पेट साफ करने के साथ संक्रमण या किटाणु बाहर निकल जाएगा। इस पर अभी प्रयोग चल रहा है। इसके साथ ही काढ़ा से संक्रमण समाप्त हो सकता है। काढ़ा उन्नाब, गिलोय, कासनी, निलोफर (सफेद कमल का फूल) और मुलेठी मिलाकर तैयार किया जा रहा है। यह बहुत उपयोगी है।

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