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अयोध्या कार सेवा : मंदिर निर्माण शुरू होते ही भर गए जख्म, 22 माह की सजा भी कम है 'श्रीराम' के लिए

अयोध्या कार सेवा : मंदिर निर्माण शुरू होते ही भर गए जख्म, 22 माह की सजा भी कम है श्रीराम के लिए
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सुल्तानपुर । एएनएन (Action News Network)

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर का निमार्ण शुरू होते ही कुश की नगरी कुशभवनपुर (सुल्तानपुर) के कारसेवकों की खुशियां का कोई ठीकाना नहीं है। उन दिनों को याद करते हुए कारसेवक भावुक हो उठते हैं। तीन सौ कारसेवकों के साथ 22 दिन जेल की सजा के जख्म सहने वाले आलोक आर्य कहते हैं, '22 महीने की सजा भी श्रीराम के लिए कुछ भी नहीं' है। मंदिर निमार्ण शुरू होते ही सारे जख्म भर गए हैं।

कारसेवा से जुड़े नगर निवासी युवा भाजपा नेता आलोक आर्य ने एक्शन इंडिया समाचार से आपबीती साझा करते हुए कहा कि सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ाई की, बाल स्वयंसेवक रहे। उस समय महज लगभग 18 साल की आयु में इंटर की पढ़ाई का समय था। कारसेवा का हुजूम नगर के गलियों में ऐसा महसूस हो रहा था कि मानों ये श्रीराम की सेना है। इनकी सेवा करना हम सबका कर्तव्य है। युवा जोश के साथ कारसेवा में कूद पड़े। भक्तों का सैलाब नगर से गुजर रहा था। उनके भोजन,जलपान की व्यवस्था में लगे थे। नगर में कर्फ्यू लग गया था। उसके बावजूद कारसेवकों की सेवा में लगे होने के कारण पुलिस ने लोगों को जेल में ठूस दिया।

पुरुषों ने महिलाओं का कपड़ा पहनकर किया पार

अयोध्या कारसेवा के लिए कारसेवक खेत के मेड़ों से होते हुए,नदियों के रास्ते उन्हें पार कराने में पूरा जिला केवट की तरह लगा रहा। रात दिन जिले के लोग सेवा में लगे हुए थे। भोजन पानी, कराने के बाद उन्हें नगर पार कराने में पूरा जिला लगा हुआ था। गोमती नदी को पार कराने के लिए नाव का सहारा लिया जाता था। कभी पानी में घूसकर नदी को लोग पार कर जाते थे। पुरुषों को महिलाओं के कपड़े पहनाकर भेजने का काम जिले के लोग करते थे। अयोध्या पहुंचते ही कारसेवकों को गिरफ्तार कर लिया जाता था। उनको जिले के रास्ते अमहट सहित अन्य जेलों में भेजा जाता था। बस अड्डे पर उनके भोजन की व्यवस्था की गई थी। बस नहीं रुकती थी। बस के अंदर भोजन पैकेट फेंक दिया जाता था।

'कह दो कारसेवा से कोई वास्ता नहीं, छोड़ दूंगा'

वे 28 अक्टूबर 1990 का दिन याद करते ही सिहर उठे और बताया कि जिले में कर्फ्यू लग गया था। मुझे तीन गाड़ी पीएसी फोर्स पकड़ने के लिए आयी थी। मुझे गिरफ्तार किया गया। पूरे मुहल्ले के लोग 'जयश्री राम' के नारे के साथ अभिवादन करते हुए मुझे विदा किया। पुलिस दो दिन थाने में बैठाए रही। एक पुलिस अफसर ने रामचरित मानस की चौपाई गाते हुए कहा कि कह दो मेरा कारसेवा से कोई मतलब नहीं, मैं छोड़ दूँगा। 'मैंने कहा कि आप तो राम भक्त हैं। चौपाई गा रहे हैं, हमसे कह रहे हैं कि कार सेवा से कोई वास्ता नहीं है। कैसे कह दूं, मैंने कहा मेरा पूरी तरह करसेवा से वास्ता है। आपको जेल में बंद करना है कर दीजिए।'

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