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आयुर्वेद में अमृत तुल्य औषधि है हल्दी - आयुर्वेदाचार्य डॉ. विजय सिंह

आयुर्वेद में अमृत तुल्य औषधि है हल्दी - आयुर्वेदाचार्य डॉ. विजय सिंह
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  • औषधि गुणों से भरपूर हल्दी को अपनाइए, कोरोना के संक्रमण जा सकता है बचा

फर्रुखाबाद । एएनएन (Action News Network)

आयुर्वेद में हल्दी का उपयोग अनादिकाल से असाध्य और जटिल रोगों को ठीक करने में होता चला आया है। जहां हल्दी का प्रयोग सेनेटराइज के रुप में किया जाता रहा है, वही हल्दी कैंसर रोग की प्रमुख दवा है। हल्दी के गुण धर्म अनेक हैं। जिसे आयुर्वेद के धुरंधर विद्वान महाराज चरक ने अपनी पुस्तक चरक संहिता में वर्णन किया है। यह कहना आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर विजय सिंह उर्फ बिल्लू का है।

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि हल्दी के अंदर वह क्षमता है जो मनुष्य को नई शक्ति प्रदान करती है और वीर्य की रक्षा करती है। हल्दी का गुणधर्म यहीं खत्म नहीं होता हल्दी गले के रोगों के लिए रामबाण है। गले के टॉन्सिल और गले की बीमारियों में भी हल्दी का उपयोग करना लाभप्रद होता है। जो टॉन्सिल ऑपरेशन करने से ठीक होते हैं वह टांसिल हल्दी के नियमित उपयोग करने से बिना किसी ऑपरेशन के ठीक हो जाते हैं। सबसे खास बात यह है कि हल्दी का निमित्त सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। जिससे कोरोना जैसे वायरस का खतरा हल्दी के सेवनकर्ता को पूरी तरह से खत्म हो जाता है।

आयुर्वेदाचार्य डॉ विजय सिंह बताते हैं कि हल्दी सूर्य के प्रकाश से शरीर में होने वाली जलन को कम करती है और नियमित सेवन करने से त्वचा रोगों को बिल्कुल समाप्त कर देती है। अगर किसी व्यक्ति को अपना रंग साफ करना है तो वह नियमित रूप से गर्म दूध या गर्म पानी के साथ आधा चम्मच हल्दी का सेवन करें तो उसका रंग साफ हो जाएगा। कई असाध्य रोगों के लिए हल्दी रामबाण साबित हो चुकी है। आयुर्वेद के अनुसार हल्दी एंटीवायरस है, हल्दी एंटीबायोटिक है।

इसी वजह तो शादी विवाह के समय हल्दी चंदन और कपूर का लेपन दूल्हा दुल्हन के ऊपर किया जाता है। जिसे उबटन कहते हैं। हमारे वैद्य और हकीमो ने महामारी रोकने के लिए देवी देवताओं की पूजा भी हल्दी और चूने से करना बताया है। तिलक भी हल्दी से लगाना बताया है। तिलक लगाने का मतलब केवल खतरनाक वायरस को रोकना था। हल्दी के औषधीय गुणों का बखान करना बहुत ही कठिन बात है। इसमें लाखों औषधि गुण समाहित हैं। कुल मिलाकर विदेश भी हल्दी को अब कैंसर रोग के लिए लोहा मानने लगे हैं और कई लोग जो कैंसर से पीड़ित थे हल्दी का नियमित प्रयोग करके सही हो चुके हैं।

आयुर्वेदाचार्य विजय सिंह का कहना है कि हल्दी पेट रोग की रामबाण दवा है। हल्दी रक्तशोधक है। रक्त को साफ करके उसके अंदर विद्यमान विषाणु ओं को बाहर निकालती है। इस वजह से हल्दी का सेवन करने से कोरोना वायरस का खतरा कम हो जाता है। इसी वजह से हल्दी का प्रयोग हमारे ऋषि-मुनियों ने सब्जियों में करना सिखाया और हल्दी का प्रयोग हरेक रूप में होता रहे इस वजह से उसे पूजा-अर्चना से जोड़ दिया। देव पूजा में हल्दी चूना और अक्षत का प्रयोग केबल वायरस के रोगों से बचाने के लिए किया गया।

आज हमें पुरानी पद्धति पर लौट कर हल्दी का प्रयोग करके तमाम बीमारियों का इलाज घर में करने की जरूरत है। आयुर्वेद जो चिकित्सा पद्धति से आपके घर में और खेतों में ही औषधियों का भंडार है। जिनके सेवन से असाध्य रोग ठीक होते हैं। हल्दी के गुण धर्म व्याख्यान करना सम्भव नहीं है। हल्दी असाध्य रोगों की रामबाण दवा है। उसका हर व्यक्ति को सब्जियों के अलावा दूध अथवा गर्म पानी के साथ नियमित करना चाहिए। मधु के साथ भी हल्दी का चूर्ण आधा चम्मच लिया जा सकता है। मौजूदा समय में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हल्दी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करती है। इस वजह से हल्दी अपनाइए और कोरोना भगाइये।

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