Top
Action India

श्रद्धा और उल्लासपूर्ण माहौल में निभाई गई बाबा विश्वनाथ के तिलकोत्सव की रस्म

श्रद्धा और उल्लासपूर्ण माहौल में निभाई गई बाबा विश्वनाथ के तिलकोत्सव की रस्म
X


वाराणसी। एएनएन (Action News Network)

माघ शुक्ल पंचमी वसंत पंचमी पर गुरुवार को काशीपुराधि बाबा विश्वनाथ के तिलकोत्सव की रस्म उल्लासपूर्ण माहौल में परम्परानुसार निभाई गई। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बाबा की पंचबदन रजत प्रतिमा पर गुलाल का तिलक लगाकर रस्म की शुरूआत की।

महंत के अस्थायी आवास टेढ़ीनीम स्थित गेस्ट हाउस में पंचबदन रजत प्रतिमा को विधि विधान से पंचगव्य से स्नान कराने के बाद वैदिक ब्राह्मणों ने प्रतिमा का षोडशोपचार विधि से पूजन के बाद रुद्राभिषेक किया। दोपहर में भोग पूजन के बाद रजत प्रतिमा को नए वस्त्राभूषण धारण कराया गया। शाम को विधि विधान से बाबा के तिलकोत्सव की रस्म पूरी की गई। पूर्व महंत मां पार्वती के पिता दक्ष प्रजापति की भूमिका में प्रतीक रूप से बैठे।

लोक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर पार्वती से विवाह के पूर्व वसंत पंचमी को दक्ष प्रजापति ने भोलेनाथ का तिलकोत्सव किया था। इस मौके पर बाबा की रजत प्रतिमा के सामने विजयायुक्त ठंडई, पंचमेवा, पीले मिष्ठान, विविध मौसमी फल का भोग लगाया गया। शाम को नगर के जाने-माने कलाकार कन्हैया दुबे और संजीव रत्न मिश्र के साथ अमलेश शुक्ला अमन, रविन्द्र सिंह ज्योति, स्नेहा अवस्थी आदि कलाकारों ने बाबा के प्रतिमा के सामने सुरों से हाजिरी लगाई। देर शाम तक शिवांजलि सांस्कृतिक कार्यक्रम में भजनों के साथ फागुनी और होली गीतों की गंगा बहती रही।

बाबा के तिलकोत्सव की झांकी देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पूर्वाह्न से ही गेस्टहाउस में उमड़ पड़ी। आधी रात में महाआरती के बाद बाबा की रजत प्रतिमा को रानी भवानी परिसर के प्रथम तल स्थित कैश रूम में पहुंचा दिया जायेगा। तिलकोत्सव की रस्म के लिए बुधवार देर शाम बाबा की प्रतिमा विधि विधान से गेस्टहाउस लाई गई। बाबा की इस रजत प्रतिमा की विशेष पूजा महाशिवरात्रि तक अब परम्परा के अनुरूप प्रतिदिन होगी। महाशिवरात्रि पर शिव विवाह के उपरांत रंगभरी एकादशी पर माता पार्वती का गौना होगा। उसी दिन बाबा की रजत पालकी के दर्शन भी आम लोग कर सकेंगे।

खास बात यह रही वर्षों पुरानी परम्परा में बाबा का तिलकोत्सव पहली बार रानी भवानी परिसर से टेढ़ीनीम स्थित गेस्ट हाउस में पूरी की गई। पूर्व महंत का आवास विश्वनाथ कॉरिडोर में अधिग्रहित होने के बाद ध्वस्त होने पर गेस्ट हाउस में परम्परा निभाई गई।

Next Story
Share it