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बेबी को भैंस पसंद है! - रामविलास जांगिड़

नई दिल्ली । Action India News

...जैसा कि दोस्तों आप सबको मालूम है कि आज हम यहां एकत्र क्यों हुए हैं? सबको पता है कि आज हमारी सियासी भैंस पानी में बैठ गई है। जैसा की आप सबको ध्यान है कि हमने भैंस के आगे खूब बीन बजाई थी। भैंस को बहुत मनाया। विश्वास किया कि वह गाना गाएगी। लजाएगी। सकुचाएगी।

अपने साथ लगे सारे एमएलए को हमारे पास ले आएगी। उछलकर कुर्सी पर भी बैठ जाएगी। लाठियों को तेल पिलाकर जिसकी लाठी उसकी भैंस कार्यक्रम भी विधिवत किया। हमने भैंस को मनाने की खूब कोशिशें की। जैसा कि सभी मीडिया भाइयों को पता है, आज भैंस आखिर पानी में बैठ ही गई। भैंस जब पूंछ उठाएगी तो वह गोबर ही देगी।

इस बात का आज सत्यापन हो चुका है। हमने खूब कोशिश की भैंस को मनाने की। उसे समझाने की। वह पानी में नहीं बैठे। लेकिन यह सियासी भैंस नहीं मानी। इसकी हरकत दिन रात चलती रही। मंच और मीडिया में सनसनी फैलाती रही। मैं कैमरामैन से कहूंगा कि वह इस समय भैंस की ताजा स्थिति बताए। वोटरों को यह भी समझाए कि आखिर यह सियासी भैंस पानी में बैठ क्यों गई?

तभी कैमरामैन भैंस को क्लोज शॉट में दिखाता है। भैंस खड़ी-खड़ी पगुराई दिखाई पड़ती है। '...तो भैंस आप बताइए कि आप कितने दिनों से इस अवस्था में पड़ी रही? कैसे-कैसे लोगों ने कितनी-कितनी प्रकार की बीन आपके सामने बजाई? आपने कीचड़ उर्फ पानी में बैठने का निश्चय कब कर लिया? हमारे दर्शकों को यह बताइएगा कि आगे अब आपकी क्या योजना है? आप जैसी सियासी भैंस से काला अक्षर कब तक बराबरी करता रहेगा? क्या अभी भी आप जिसकी लाठी उसी की भैंस बन जाएंगी? या फिर भविष्य में आप पानी में बैठने की इच्छा रखती हैं? जबकि आप दलदल में भटक कर कीचड़ नुमा दलदल में ही बैठना पसंद ...।'

तब सियासी भैंस ने अपने मुंह के मास्क को नीचे सरकाया, सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई। नारों के बीच अपनी पूंछ फटकारी और कहा- 'इस समय जो भी सियासत चल रही है उसमें मेरा पानी में बैठना लगभग तय ही था। मैंने बहुत कोशिश की कि मैं पानी में नहीं बैठूं। लेकिन मेरे कार्यकर्ताओं ने मुझे यही कहा कि तुम जल्दी से पानी में बैठ जाओ। मुझे अपने कार्यकर्ताओं को जवाब देना है। इसलिए मेरे सामने कितनी ही बीन बजाई गई।

मेरे लिए खूब गीत गाए। बेबी को भैंस पसंद है। दल्ला को केस पसंद है, जैसे खूब गीत सुनाए। मुझे कोई कुर्सी का लालच भी नहीं डिगा सका। अंततः मैंने निश्चय कर लिया कि मैं फिलहाल कीचड़ में ही बैठना पसंद करूंगी। मुझे इस देश के नागरिकों की चिंता है। मुझे इस देश के किसानों मजदूरों की सेवा करनी है। इसलिए आज मैं पानी में ही बैठ रही हूं।' कहकर भैंस ने उछल कर कीचड़ में छलांग लगा दी। दूर-दूर तक पानी का नामोनिशान न था।

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