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लॉकडाउन में ऑफसेट वालों की धुंधली हुई कमाई की आस

लॉकडाउन में ऑफसेट वालों की धुंधली हुई कमाई की आस
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  • लॉकडाउन में खाली बैठे ऑफसेट प्रिंटिंग वालों को पंचायत चुनाव का आसरा

बलिया । एएनएन (Action News Network)

कोरोना संकट के बीच हुए लॉकडाउन में प्रचार सामग्री छापने वाले ऑफसेट प्रिंटिंग वालों के सामने घोर संकट खड़ा हो गया है। ऑफसेट वालों को अब पंचायत चुनाव का असरा है। भले ही लाख सोशल मीडिया का जमाना है। अभी भी दीवारों पर इबारत लिखने की परम्परा कायम है। हां, इसमें थोड़ा बदलाव जरूर हुआ है। अब ब्रांडिंग या प्रचार के लिए फ्लैक्स बोर्ड छपवाने का चलन है। इसके लिए शहर-शहर ऑफसेट प्रेस स्थापित हो गए हैं। इस व्यवसाय में हजारों हाथों को काम मिलता है। लेकिन कोरोना का संकट पैदा होने से ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले लोग खाली बैठे हैं।

लॉकडाउन पांच में ढील दिए जाने से ऑफसेट खुल तो गए हैं, पर उनके पास काम नहीं आ रहे। शहर के मशहूर प्रिया कम्प्यूटर ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस में डिजाइन का काम करने वाले परवेज ने बताया कि हमारे यहां आठ लोग काम करते हैं। लॉकडाउन के पहले डेढ़ से दो हजार स्क्वायर फीट का ऑर्डर मिलता था। अब तो सौ स्क्वायर फीट के लिए भी ऑर्डर मिलना मुश्किल है। इससे दो लोगों का भी खर्च निकलना दूभर हो गया है।

परवेज ने बताया कि हमलोगों को घर का खर्च चलाने में भी दिक्कतें आ रही हैं। कहा कि इस साल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने थे। जिसके लिए प्रत्याशी आठ-दस महीने पहले से ही प्रचार-प्रसार सामग्री छपवाना शुरू कर देते हैं। इस बार भी हमने यही उम्मीद लगाई थी। इसके लिए कच्चा माल मंगा लिया गया था। अब इस वर्ष पंचायत चुनाव होना मुश्किल दिख रहा है। लिहाजा कोई प्रत्याशी नहीं आ रहे। हालांकि हमें अब पंचायत चुनाव का ही आसरा है।

सरकारी विज्ञापन से मिल रही संजीवनी

ऑफसेट वालों को लॉकडाउन में प्रचुर मात्रा में काम तो नहीं मिल रहा, लेकिन कोरोना को लेकर सरकारी विज्ञापनों का फ्लैक्स बोर्ड बनाकर संजीवनी प्राप्त कर रहे हैं। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इक्का-दुक्का ऑर्डर मिलने से ऑफसेट वाले राहत महसूस कर रहे हैं। शहर की कुछ बड़ी दुकानों के तरफ से भी अब ऑर्डर मिलने लगे हैं।

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