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यहां रोज चट कर जाते हैं तीन लाख की कचौरी

यहां रोज चट कर जाते हैं तीन लाख की कचौरी
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बांसवाड़ा। एएनएन (Action News Network)

आप मानें या न माने मात्र सवा लाख की आबादी वाले बसंवाड़ा जैसे छोटे शहर में रोजाना करीब तीन लाख रुपये से अधिक की कचौरी लोग चट कर जाते हैं। पूरे साल में यह आंकड़ा करीब-करीब 9-10 करोड़ बैठता है। जी हां यहां अलग-अलग दुकानों पर बनने वाली कचौरियों का स्वाद ही कुछ ऐसा है कि हर कोई इनका दीवाना है।

नसीराबाद का कचौरा, जोधपुर के मिर्चीबडे की तरह तो यहां की कचौरी की ख्याति नहीं बन पाई लेकिन शहर के लोगों की जुबान पर चाहे हिंग वाली कचौरी हो या फिर कोटा कचोरी , भैरुनाथ की कचौरी या जोधपुर की कचौरी उसका स्वाद लोगों को खींच ही लेता है। कचौरी खाने के शौकीन ऐसे हैं कि दिन में एक बार जब तक इसका स्वाद चख ना ले उनका कुछ खाने का मन ही नहीं करता। शहर के कुछ प्रमुख स्थानों पर सुबह सुबह बनने वाली गर्मागर्म कचौरियों की खुशबू ऐसी होती है कि चलते हुए लोगों के कदम रुक जाते हैं और कचौरी खाए बिना आगे नहीं बढ़ते।

हर रविवार का स्पेशल नाश्ता है कचौरी

रविवार को छुटटी का दिन होता है। सभी घर में रहते हैं। इस दिन ब्रेकफ ास्ट भी कुछ स्पेशल होना चाहिए। इस सूची में कचौरी का नाम भी शुमार है। घर में मेहमान आते हैं तो सबसे पहले कचौरी की ही याद आती है। कुछ शौकीन तो ऐसे हैं कि कचौरी खाने सुबह सुबह ही दुकान पर पहुंच जाते हैं।

कचौरियां कचौरी बनाने वालों ने बताया कि सुबह 10-11 बजे तक तो समोसे और पौहे का नाश्ता होता है, लेकिन इसके बाद अधिकांश दुकानों पर केवल कचौरी ही मिलती है। अमूमन सुबह 11 से दोपहर एक से दो बजे तक कचौरियोंं की ही बिक्री होती है। हर दिशा में कचौरी की महक शहर में पुराना बस स्टेण्ड हो या दाहोद रोड़ या फिर प्रताप सर्कल या फिर डूंगरपुर मार्ग। शायद ही शहर की कोई ऐसी जगह हो जहां हमें कचौरी की ठेलियां दिखाई ना दे।

शहर में ही कम से कम 10 से 12 दुकानें ऐसी हैं जहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में कचौरियों की बिक्री होती है। विक्रेता भैरूलाल ने बताया कि पूरे शहर में एक ही दिन में करीब तीन लाख रुपये से अधिक की कचौरियां बिक जाती हैं। कहीं एक कचौरी की कीमत दस तो कहीं पर यह पांच से सात रुपये में मिलती है।

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