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लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता गिरीश गुप्ता की जमकर पिटाई

लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता गिरीश गुप्ता की जमकर पिटाई
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बेगूसराय । एएनएन (Action News Network)

लॉकडाउन का उल्लंघन करने के आरोप में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता गिरीश प्रसाद गुप्ता की पिटाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस संबंध में पीड़ित आरटीआई कार्यकर्ता 75 वर्षीय गिरीश प्रसाद गुप्ता ने बिहार के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसपी को आवेदन देकर मामले की उच्च स्तरीय जांच करते हुए न्याय की गुहार का त्राहिमाम संदेश भेजा है। इस संबंध में गिरीश प्रसाद गुप्ता का कहना है कि वह 2006 से ही आरटीआई के माध्यम से भ्रष्टाचार से संबंधित सैकड़ों मामलों को उजागर किया है। इस दौरान तेघड़ा अंचल कार्यालय से लेकर अनुमंडल कार्यालय तक के कई मामलों की बखिया उधेड़ी गई है तथा कई मामला चल रहा है।

स्थानीय प्रशासन की मनमानी और भ्रष्टाचार को उजागर करते रहे हैं। जिससे आक्रोशित होकर लॉकडाउन की आड़ में अधिकारियों ने अपनी मौजूदगी में अपने बॉडीगार्ड को उन्हें पीटने का आदेश दिया।इसके बाद उनके शरीर पर डंडे भी बरसाये गए तथा कई जगह गंभीर चोटें आई है। लॉकडाउन के बहाने तेघड़ा एसडीओ डॉ. निशांत, बीडीओ परमानंद पंडित, अंचल अधिकारी आदित्य विक्रम एवं पशुपालन अधिकारी ललन कुमार ने सुनियोजित साजिश के तहत फुलवड़िया थाना के सहयोग से 15 अप्रैल की रात करीब आठ बजे उन्हें घर से जबरन उठा लिया और थाना पर ले जाकर मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। जमकर पिटाई करने के बाद रात करीब दस बजे पीआर बांड पर छोड़ा गया।

जबकि मैं किडनी की बिमारी से ग्रस्त हूं तथा लॉकडाउन में घर के अंदर रखकर सरकारी दिशा निर्देश का पालन कर रहा हूं। इसके बावजूद अधिकारियों ने सुनियोजित षड्यंत्र के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई और अपने बॉडीगार्ड के हाथों जमकर पिटाई कराया है। घटना की उच्च स्तरीय जांच हो तो मामले का खुलासा हो जाएगा। इधर तेघड़ा एसडीओ डॉ. निशांत ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि अधिकारियों द्वारा अपने सामने गार्ड से पिटाई की बात गलत है, मैं उन्हें पहचानता भी नहीं है। लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे हैं, हो सकता है कि इन्होंने भी लॉक डाउन का उल्लंघन किया होगा। जिसके कारण इन्हें गिरफ्तार कर थाना पर लाने के बाद पीआर बांड पर मुक्त कर दिया गया।

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