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भीमा-कोरेगांव मामले में पुलिस की भूमिका संदेहास्पद : शरद पवार

भीमा-कोरेगांव मामले में पुलिस की भूमिका संदेहास्पद : शरद पवार
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मुंबई। एएनएन (Action News Network)

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि पुणे में भीमा कोरेगांव मामले में पुलिस की भूमिका संदेहास्पद है। इसलिए इस मामले से जुड़े पुलिसकर्मियों की जांच जरूरी है। शरद पवार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी भीमा कोरेगांव की जांच पर प्रश्रचिह्न लगाए थे और मामले की जांच अलग से कराए जाने का निर्देश दिया था।

उन्होंने इसी आधार पर इस मामले की अलग से जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की थी।शरद पवार मंगलवार को मुंबई में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके मुख्यमंत्री को पत्र भेजने के दो घंटे बाद ही केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी। इसलिए इस मामले से जुड़े लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय में गोपनीयता को भंग करने वाले अधिकारी की भी जांच की जानी चाहिए।

राकांपा नेता ने कहा कि भीमा कोरेगांव व एल्गार परिषद दो अलग-अलग मामले हैं। एल्गार परिषद भीमा कोरेगांव में 01 जनवरी,2018 को निकाले गए विजय जुलूस से पहले आयोजित की गई थी। इस परिषद में सुधीर ढवले, पूर्व न्यायाधीश बी.जी. कोलसे पाटील, प्रकाश आंबेडकर सहित 100 से अधिक संस्थाओं के लोग जमा हुए थे। इस परिषद में सुधीर ढवले ने राज्य व्यवस्था के संदर्भ में एक कविता पढ़ा था। इसी कविता को लेकर उन पर और इस परिषद में उपस्थित न रहने वालों पर भी मामला दर्ज किया गया। इस परिषद के बाद उपस्थित लोगों ने संविधान व लोकशाही की रक्षा करने की भी कसम खाई थी।

इस मामले की पुणे पुलिस की रिपोर्ट को आधार बना कर मामला दर्ज किया गया। शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस हमेशा अच्छा काम करती रही है लेकिन पिछली सरकार ने पुलिस का दुरुपयोग किया और पुलिस ने पिछली सरकार के कहने पर जो मामला दर्ज किया, जांच की वह हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सभी एजेंसियां लगी हुई हैं और पुणे पुलिस का कहना प्रधानमंत्री की जान को खतरा है, यह अपने आप में हास्यास्पद है।

सवाल उठता है कि पुणे पुलिस को प्रधानमंत्री की सुरक्षा की चिंता आखिर क्यों है? शरद पवार ने कहा कि भीमा कोरेगांव में जुलूस के दौरान हुई हिंसा की जांच अभी तक नहीं की गई, जबकि इस मामले में महाराष्ट्र के कोने-कोने से आने वाले निहत्थे दलितों पर हमला किया गया था। शरद पवार ने कहा कि एल्गार मामले की जांच अगर एनआईए कर रही है तो राज्य सरकार भी इसकी अलग जांच कर सकती है। इसकी घोषणा गृहमंत्री कर चुके हैं। इस जांच में दूध का दूध पानी का पानी सामने आ जाएगा।

उल्लेखनीय है कि एक जनवरी,2018 को पुणे जिले में स्थित भीमा कोरेगांव में विजय जुलूस के दौरान हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। घटना से पहले पुणे में स्थित शनिवारवाड़ा क्षेत्र में एल्गार परिषद का आयोजन किया गया था। इन दोनों की जांच पिछली सरकार के कार्यकाल में पुणे पुलिस ने किया था और इस मामले में नक्सल कनेक्शन उजागर हुआ था। इस मामले में पुणे पुलिस ने 11 लोगों पर मामला दर्ज किया है। इनमें नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, सभी इस समय जेल में हैं।

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