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गहलोत की अमर्यादित भाषा से मुख्यमंत्री पद की गरिमा तार-तार हुई- डॉ. पूनियां

गहलोत की अमर्यादित भाषा से मुख्यमंत्री पद की गरिमा तार-तार हुई- डॉ. पूनियां
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जयपुर । Action India News

भारतीय जनता पार्टी प्रदेशाध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां ने कहा कि प्रदेश के पॉलिटिकल थियेटर ड्रामा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जिस तरीके की भाषा का इस्तेमाल किया है, उससे मुख्यमंत्री पद की गरिमा तार-तार हुई है।

डॉ. सतीश पूनियां ने कहा कि राजस्थान के इस पॉलिटिकल ड्रामे में नायक और खलनायक कांग्रेस है, लेकिन तोहमत भाजपा पर लगाते हैं। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के कालखंड से शुरुआत करें लंबी फेहरिस्त है चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, चौधरी चरण सिंह, मोरारजी देसाई, ममता बनर्जी, शरद पवार, जगनमोहन रेड्डी अनेकों ऐसे नेता हैं जो कांग्रेस पार्टी को छोड़कर गए, जिसका एक ही कारण ही इन सभी की उपेक्षा की गई और गांधी-नेहरू परिवार की चापलूसी करने वालों को सत्ता में भागीदारी मिलती रही।

उन्होंने कहा कि सरकार, मंत्री और विधायक कितने दिन तक बाड़े में बंद रहेंगे, प्रदेश की जनता उन्हें ढूंढ रही है, जनता के काम नहीं हो रहे हैं, इसको लेकर मुख्यमंत्री जवाब दें। कोरोना के आंकड़े प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे हैं, आमजन परेशान हैं तो वहीं सरकार, उनके मंत्री एवं विधायक होटल में कैरम, फुटबॉल खेल रहे हैं, मुगल-ए-आजम, शोले जैसी फिल्में देखी जा रही हैं, और सोनिया गांधी को खुश करने के लिए इटालियन डिश भी बनाई जा रही है।

राज्य सरकार द्वारा सीबीआई जांच को लेकर जारी किये गये नोटिफिकेशन पर डॉ. पूनियां ने कहा कि इसको लेकर राज्य सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक राज्य सरकार की सहमति के बाद ही सीबीआई किसी भी मामले की जांच कर सकेगी, पहले विशेष मामलों की राज्य सरकार की अनुमति के बिना भी सीबीआई सीधे तौर पर भी जांच कर सकती थी, लेकिन 19 जुलाई को राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर अब सभी मामलों में राज्य सरकार की अनुमति जरूरी कर दी है, तो इससे साफ है कि दाल में कुछ काला, मुख्यमंत्री ने कुछ छिपाने के लिये ऐसा फैसला लिया है।

मुख्यमंंत्री ने अमर्यादित एवं अंसुतिलित भाषा का इस्तेमाल किया है, जिससे साफ है कि वे नैतिक तौर पर कमजोर हो चुके हैं और नैतिक तौर पर हार भी मान चुके हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री अपने ही लोगों के खिलाफ संसदीय आचरण की गरिमा के खिलाफ जाकर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसी भाषा के लिये कोई स्थान नहीं है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने गहलोत पर निशाना साधते हुये कहा कि आपकी सरकार बचाने की कोई हमारी नैतिक जिम्मेदारी थोड़े ही है, अपने कर्मों से ही यह सरकार जाएगी। मुख्यमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ मुख्यमंत्री अमर्यादित भाषा बोल रहे हैं, राजस्थान को तमाशा बना रखा है, त्रिस्तरीय सुरक्षा में विधायकों को कैद कर रखा है, जब मुख्यमंत्री को विधायकों पर विश्वास है, तो फिर क्यों होटल में कैद कर रखा है। बीटीपी के विधायकों के साथ कैसा आचरण किया गया, किस तरह डराया धमकाया गया, सब जानते हैं।

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