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सीएए और एनआरसी के विरोध में चलाया पोस्टकार्ड अभियान

सीएए और एनआरसी के विरोध में चलाया पोस्टकार्ड अभियान
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  • भीम आर्मी, असुर छात्र संगठन और पूर्वांचल सेना के वलंंटियर्स ने चलाया अभियान

  • प्रधानमंत्री को हस्ताक्षरयुक्त पोस्टकार्ड भेजने की है तैयारी

गोरखपुर। एएनएन (Action News Network)

सीएए, एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ पोस्टकार्ड अभियान शुरू हुआ। पूर्वांचल सेना, भीम आर्मी और असुर छात्र संगठन के वालंटियर्स ने बुधवार को विश्वविद्यालय के मुख्यद्वार पर इसकी शुरुआत की। पूर्वांचल सेना, भीम आर्मी और असुर छात्र संगठन के वालंटियर्स ने बाकायदा बैनर लगा रखा है।

बैनर पर संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का जिक्र करते हुए एनआरसी लागू होने पर वर्ष 1971 के पहले का कागजात मांगे जाने का भय दिखा रहे हैं। इतना ही नहीं, बैनर पर बाकायदा पिछड़ों और दलितों का जिक्र करते हुए कहा है कि इनके पास वर्ष 1971 के पूर्व के कोई कागजात नहीं हैं। ऐसे में उन्हें भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। मोदी सरकार द्वारा पारित एनआरसी कानून के बारे में भी बताया गया है।

बैनर पर लिखा है कि 'नागरिकता संशोधन कानून 2019 (नागरिकता अधिनियम 1955 के सेक्शन दो के उपसेक्शन 01 में संशोधन) 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले आये हिन्दू, पारसी, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई; जो अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश के शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी। उसके नीचे लिखे नोट में मुस्लिम, नास्तिक, लिंगायत आदि धर्मों का कोई वर्णन नहीं, लिखा है।

उन्हें यह भी बताया गया है कि ये सभी लोग एनआरसी से बाहर ही जायेंगे। इन्हें बताया गया है कि सीएए के द्वारा नागरिकता लेने के लिए उन्हें अपने को किसी देश से आया शरणार्थी घोषित करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, उन्हें यह भी साबित करना होगा कि वे मुस्लिम नहीं हैं। यदि एनआरसी द्वारा छांटे गए बहुजनों की नागरिकता मिल भी गई तो वे दोयम दर्जे के नागरिक होंगे, जो हमें मंजूर नहीं।

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